
रांची
झारखंड हाई कोर्ट में सीजीएल परीक्षा रद करने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई जारी है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले में सीआईडी की जांच जारी है।
इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि वह सीआईडी की जांच को लेकर सुनवाई नहीं कर रही है। अदालत ने कहा कि वह 2700 अभ्यर्थियों को एक नोटिफिकेशन के माध्यम से हटाए जाने के मामले की सुनवाई कर रही है। अदालत ने कहा कि यह मामला गंभीर है और वह मामले में जल्द से जल्द निर्णय देना चाहती है।
अदालत ने कहा कि उसे सिर्फ यह देखना है कि सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के लिए सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है या नहीं। सरकार के जवाब को देखते हुए अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सरकार ने दबाव में नियुक्ति रद करने का निर्णय लिया है। फिलहाल मामले में दोपहर 2:15 बजे से फिर सुनवाई होगी।
विभिन्न परीक्षाओं के अभ्यर्थियों ने दी चुनौती
उल्लेखनीय है कि अदालत के समक्ष अलग-अलग याचिकाओं के जरिए अभ्यर्थियों ने सरकार और आयोग के विज्ञापन रद्द करने के निर्णय को चुनौती दी है. प्रार्थी रमेश उरांव व अन्य की ओर से याचिका दायर कर जेएसएससी सीजीएल परीक्षा-2023 को रद्द करने की सरकार की अधिसूचना को चुनौती दी गई है, जबकि प्रार्थी सुभाष मुरमू व अन्य ने सीडीपीओ नियुक्ति परीक्षा रद्द किए जाने के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. इसके साथ ही प्रार्थी दीपमाला, आशीष अक्षत, आकांक्षा मिंज व अन्य ने जेपीएससी 11वीं से 13वीं प्रतियोगिता परीक्षा तथा प्रार्थी सौरभ सिंह व अन्य ने फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा रद्द करने के फैसले को निरस्त करने की मांग की है।
अभ्यर्थियों के भविष्य पर छाया संकट
प्रार्थियों की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि परीक्षा प्रक्रियाओं के अंतिम चरण या विज्ञापन जारी होने के बाद अचानक बिना किसी ठोस व तार्किक कारण के पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करना गलत है. सरकार के इस कदम से वर्षों से तैयारी कर रहे हजारों योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है और उनकी उम्र सीमा भी समाप्त हो रही है. फिलहाल हाईकोर्ट की इस पीठ में मामले पर बहस जारी है और अदालत के रुख पर राज्यभर के युवाओं की नजरें टिकी हुई हैं।






