
कलकत्ता
पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है. पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने सोमवार को कहा कि सीएम सुवेंदू अधिकारी की सरकार जल्द विधानसभा में नाम बदलने का विधेयक ला सकती है. उन्होंने दावा किया कि अगले विधानसभा सत्र में पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंगा’ करने का प्रस्ताव रखा जा सकता है. बीजेपी नेता के मुताबिक यह फैसला राज्य को उसके इतिहास और बंगाली पहचान से जोड़ने के मकसद से लिया गया है. पिछले 27 सान में तीन बार पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की कोशिशें राज्य सरकारों की तरफ से की गई. हालांकि केंद्र और राज्य में अलग अलग पार्टी की सरकार होने के कारण पहले ऐसा नहीं हो सका. इस बार इस बात की संभावना प्रबल है कि वेस्ट बंगाल का नाम बदलकर पश्चिम बंगा रख दिया जाए।
अब वेस्ट बंगाल नहीं, पश्चिम बंगा?
समिक भट्टाचार्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि लोगों को जल्द ‘बांग्ला’ या ‘वेस्ट बंगाल जैसे नामों का इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बहुत जल्द विधानसभा में विधेयक पेश करेगी. हालांकि यह प्रस्ताव कब और किस प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा, इसकी अंतिम स्थिति विधानसभा में विधेयक आने के बाद ही साफ होगी. नाम बदलने का मुद्दा पश्चिम बंगाल में नया नहीं है. इसके पीछे बंगाली पहचान और औपनिवेशिक दौर से जुड़े नाम को बदलने की दलील पहले भी दी जाती रही है. लेकिन राजनीतिक सहमति और केंद्र की मंजूरी नहीं मिलने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका।
1999 से चल रही नाम बदलने की कहानी
पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की कोशिशों का इतिहास करीब ढाई दशक पुराना है. 1999 में ज्योति बसु के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार ने पश्चिम बंगा नाम रखने का प्रस्ताव विधानसभा में रखा था. उस समय बांग्ला नाम पर भी चर्चा हुई थी. प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया लेकिन मंजूरी नहीं मिली. 2011 में ममता बनर्जी सरकार आने के बाद यह मुद्दा फिर उठा. उस समय पश्चिम बंगा नाम का प्रस्ताव रखा गया. सरकार का तर्क था कि अंग्रेजी वर्णक्रम में वेस्ट बंगाल नीचे आता है. इससे राष्ट्रीय बैठकों में राज्य के प्रतिनिधियों को अपनी बारी के लिए इंतजार करना पड़ता है. हालांकि केंद्र ने इसे मंजूरी नहीं दी।
2016 में फिर बदला प्रस्ताव
2016 में नाम बदलने की कवायद दोबारा शुरू हुई. सरकार ने अलग-अलग भाषाओं में ‘बांग्ला’, ‘बंगाल’ और ‘बंगाल’ जैसे नामों पर विचार किया. 2018 में विधानसभा ने सर्वसम्मति से ‘बांग्ला’ नाम रखने का प्रस्ताव पास किया. यह प्रस्ताव भी केंद्र की मंजूरी हासिल नहीं कर सका. केंद्र की ओर से संवैधानिक संशोधन की जरूरत बताई गई. साथ ही बीजेपी के एक वर्ग ने ‘बांग्ला’ नाम को बांग्लादेश से मिलता-जुलता होने पर आपत्ति जताई थी. यानी नाम बदलने की कोशिश कई बार हुई लेकिन हर बार मामला राजनीतिक और संवैधानिक पेच में फंस गया।
वाराणसी में बनेगा पश्चिम बंगा भवन
समिक भट्टाचार्य ने वाराणसी में प्रस्तावित ‘पश्चिम बंगा भवन’ की जानकारी भी दी. उनके मुताबिक राज्य का संस्कृति और पर्यटन विभाग केंद्र और कूचबिहार के राजपरिवार के वंशजों के साथ मिलकर इसकी योजना पर काम कर रहा है. यह भवन सांस्कृतिक केंद्र के साथ बंगाल से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए ठहरने की जगह भी होगा. इसमें सम्मेलन कक्ष, पुस्तकालय और बंगाली साहित्य व गीतों का संग्रह प्रस्तावित है. वाराणसी और बंगाल के पुराने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंध को भी इस परियोजना की बड़ी वजह बताया गया है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार पश्चिम बंगा नाम का प्रस्ताव विधानसभा से आगे निकलकर केंद्र की मंजूरी तक पहुंच पाएगा? पिछले अनुभवों को देखते हुए इस पर सबकी नजर रहेगी।






