उत्तर प्रदेश

बारिश से लखनऊ में बाढ़ का खतरा, सई-गोमती और बेहता का बढ़ा जलस्तर; कई गांवों में दहशत

लखनऊ
यूपी में बीते कुछ दिनों से लगातार जारी बारिश से नादियां-नाले उफान पर हैं। लखनऊ शहर में गोमती का जलस्तर बढ़ने के साथ ही रहीमाबाद में बेहता और बंथरा व निगोहा इलाके से बहने वाली सई नदी का जलस्तर भी बढ़ गया है। रहीमाबाद में झाऊ बेरिया गांव में बेहता का पानी पुलिया के ऊपर से बह रहा है। निगोहां इलाके में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। जबकि बंथरा में सई नदी का जलस्तर बढ़ने से सैकड़ों बीघे फसले पानी में डूब गई है। नदी का पानी गांवों की ओर बढ़ने से ग्रामीणों को बाढ़ की चिंता सताने लगी है। वहीं, बीकेटी में चन्द्रिका देवी मंदिर के पास गोमती का जलस्तर बढ़ गया है।

बेहता का जलस्तर बढ़ा, झाऊ बेरिया गांव की पुलिया डूबी
बेहता नदी पर झाऊ बेरिया गांव जाने के लिए बनी पुलिया इधर नाले के जलस्तर बढ़ने के कारण डूब गई है। ग्रामीणों का रहीमाबाद या शहर जाने का यह एक मात्र रास्ता है। ग्राम प्रधान रुसेना सुरसती देवी ने बताया कि झाऊ बेरिया गांव में प्राथमिक विद्यालय बना है। जिसमें अन्य गावों के बच्चे भी पढ़ने आते हैं। पुलिया डूबने से परिजनों ने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है। ग्रामीणों को पानी से गुजरकर रहीमाबाद आना पड़ रहा है। शाहीखेड़ा निवासी ध्रुव कुमार ने बताया कि बारिश जारी है और बेहता नाले के जलस्तर में इजाफा हुआ तो गांव के लोग घरों में ही कैद हो जाएंगे। एडीएम मलिहाबाद मनोज कुमार सिंह ने बताया कि जलस्तर बढ़ने की जानकारी है। तहसीलदार कुमकुम मिश्रा को राजस्व टीम के साथ मौके पर भेजा गया था। जलस्तर और बढ़ता है तो ग्रामीणों के लिए नाव व अन्य इंतजाम किए जाएंगे।

सई नदी का जलस्तर बढ़ने से निगोहा इलाके में बाढ़ जैसे हालात
सई नदी का जलस्तर बढ़ने से निगोहा इलाके में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। जवाहरखेड़ा के पास बंधा पानी में डूब गया। जवाहरखेड़ा, राती, रंजीतखेड़ा, तारापुर और अघईया समेत दर्जनभर गांव नदी के किनारे बसे हैं। नदी का पानी तालाबों के रास्ते खेतों और खलिहानों तक पहुंच गया। इससे कई बीघे धान, उड़द और तिल्ली की फसल जलमग्न हो गई। नदी किनारे बसे गांवों के ग्रामीणों में दहशत है। नदी से जुड़ा बांक नाला भी उफान पर है, जिससे निचले इलाकों के खेतों में पानी भर गया।

किसान मुन्नीलाल, रामभरोसे, शिवबालक, राजाराम, रामसुमिरन, रामकुमार ने बताया कि बंधा टूटने के बाद पानी तेजी से तालाबों और फिर कल्यानी तक पहुंच गया। किसानों ने बताया कि जलस्तर जल्द नहीं घटा तो धान समेत अन्य फसलें पूरी तरह बर्बाद हो सकती हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से टूटे बंधे की तत्काल मरम्मत कराने, प्रभावित गांवों का निरीक्षण करने और फसल नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।

बंथरा में सई नदी का जलस्तर बढ़ने से फसलों को नुकसान
बंथरा क्षेत्र से होकर गुजरने वाली सई नदी में जलस्तर अचानक बढ़ने से इलाके में हड़कंप मच गया है। नदी का जलस्तर 12 फीट तक पहुंच जाने के कारण आसपास के सैकड़ों किसानों की धान, उड़द और तिल्ली की फसलें पूरी तरह से डूबकर नष्ट हो गई हैं। पानी लगातार नए रिहायशी और ग्रामीण इलाकों की ओर रुख कर रहा है।

अस्पताल की इमारत और गांवों तक पहुंचा पानी
नदी का जलस्तर बढ़ने से पानी लटऊवा, दाराब नगर बरकोता, तेरवा, गोड़वा, कल्लन खेड़ा, बेंती और बनी गांव की ओर तेजी से फैल रहा है। स्थिति यह है कि नदी किनारे स्थित बनी गांव के पास प्रसाद अस्पताल की इमारत तक भी बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। वर्तमान में नदी का जलस्तर करीब 12 फीट है। यदि इसमें 4 से 5 फीट की और बढ़ोतरी होती है, तो नदी का पानी कई अन्य रिहायशी गांवों में भी घुस जाएगा। बनी गांव निवासी वरिष्ठ नागरिक और समाजसेवियों के अनुसार, वर्ष 1962 में सई नदी का जलस्तर करीब 15 फीट तक चला गया था, जिससे बनी, कल्लन खेड़ा, बेंती, सैदपुर और गोदौली सहित कई गांव पूरी तरह जलमग्न हो गए थे।

गोमती बैराज से दो गेट पूरे खुले, जलस्तर नियंत्रित
गोमती नदी के जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए सिंचाई विभाग ने गोमती बैराज के दो गेट पूरी तरह से खोल दिये हैं। शारदा नहर खंड-दो के अधिशासी अभियंता मुकेश वैश्य ने बताया कि जल निकासी के लिए गुरुवार को गोमती बैराज के दो गेट को पूरा खोल दिया गया। वहीं तीन अन्य गेट करीब दो फुट तक खोला गया है। फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं है। गुरुवार को भी गऊघाट पर गोमती का जलस्तर 349.5 फुट बना रहा। जोकि सामान्य से करीब ढ़ाई फुट अधिक है।

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