उत्तर प्रदेश

लोगों को भ्रमित कर रही एआई जनित खबरें

लोगों को भ्रमित कर रही एआई जनित खबरें

एनएमसी से जुड़ी फेक न्यूज़ सोशल मीडिया पर वायरल 

लखनऊ
 सोशल मीडिया लोगों की दिनचर्या का एक हिस्सा बन गया है। जहां दिन भर तरह-तरह की खबरें प्रसारित और प्रचारित होती रहती हैं। देखने और पढऩे में सामान्य सी लगने वाले कई समाचार सच से कोसों दूर होते हैं। यह खबरें केवल न्यूज पेपर कटिंग तक सीमित नहीं है घटना-दुर्घटना के वीडियो भी एआई से बनाकर व्यूज बटोरने के लिए सोशल मीडिया पर वायरल किए जा रहे हैं। खबरों से प्रभावित होने वाले जब उसकी पड़ताल करते हैं तो पता चलता है कि वह समाचार एआई यानि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बना है। 

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तकनीक के हमेशा से ही दो पहलू रहे हैं। एक वह जो मानव सभ्यता के लिए लाभदायक होता है तो दूसरा आम आदमी का जीवन खतरे में डाल सकता है। इसी तकनीक का ताजा उदाहरण है एआई। आज के समय में हर कोई एआई का मास्टर बनना चाहता है। एआई आपकी तस्वीर को सुन्दर बनाने से लेकर कपड़े और लोकेशन तक बदल सकता है। इतना ही नहीं आप एआई की मदद से कोई भी वीडियो बना सकते हैं। आज इसी तकनीक का सहारा लेकर कई लोग फेक न्यूज़ और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर व्यूज बढ़ा रहे हैं। यही लोग समाचार पत्र की कटिंग सी लगने वाली खबर भी एआई से बनाकर सोशल मीडिया में पोस्ट कर रहे हैं। कई समाचार पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली खबरों के फैक्ट जांचे बगैर ही उन्हें अखबार में जगह दे देते हैं। जो लोगों की परेशानी का सबब बन जाता ह है। फर्जी खबरों की कड़ी में एक न्यूज सोशल मीडिया पर वायरल हुई जो राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) से जुड़ी थी । जिसमें NMC द्वारा डमी फैकल्टी की लिस्ट तैयार किये जाने की जानकारी दी गयी थी। लिस्ट उन डॉक्टरों की जो तैनात तो हैं पर कॉलेज नहीं जाते। अब प्रभावित लोगों ने इसकी पड़ताल की हकीकत सामने आई कि समाचार फर्जी और एआई जनित है। लोगों का कहना है कि इससे होने वाली परेशानी से मानसिक दबाव बनाता है।
कभी किसी दुर्घटना की फर्जी खबर आ जाती है तो कभी किसी प्रतियोगी परीक्षा का रिजल्ट आ जाता है। यहां तक की एआई से लोग अफसरों के नियुक्ति और आदेश पत्र बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहे हैं। और ऐसे लोगों की भी संख्या कम नहीं है जो बगैर सच को जाने समझे उस पत्र को शेयर करते चले जाते हैं। आए दिन ऐसी दर्जनों पोस्ट वायरल होती हैं जिनका सच से कोई लेना देना नहीं। किसी कोई भी जागरूक नागरिक इसकी पड़ताल करता है तब यह पता चला है कि समाचार पत्र या वीडियो एआई से जेनरेट किया गया है।

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