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भारत-चीन के बीच नई आर्थिक दोस्ती की तैयारी, निवेश फ्रेमवर्क पर बन सकती है बड़ी डील

नई दिल्‍ली
अमेरिका और भारत के बीच व्‍यापार को लेकर बातचीत चल रही है. लेकिन फिर भी ट्रंप बार-बार रूसी तेल खरीदने या फिर किसी वजहों से टैरिफ की धमकी देते रहते हैं. इस बीच, भारत अब चीन के साथ मिलकर बड़ा खेल करने जा रहा है, जो आगे चलकर ग्‍लोबल चेन सप्‍लाई को बदल सकता है। 

दरअसल, ब्रिक्‍स समिट के दौरान चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने की खबर है और इस दौरान एक बड़े निवेश फ्रेमवर्क की भी तैयारी चल रही है. चीन भारत के लिए एक बड़ा निवेश पैकेज का ऐलान कर सकता है, जो भारत के लिए बूस्‍टर साबित हो सकता है. दूसरी ओर, दोनों देशों के बीच व्‍यापार के लिए रिश्‍तों में सुधार होगा. ऐसे में भारत और चीन मिलकर ग्‍लोबल सप्‍लाई चेन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। 

मोदी-जिनपिंग की होगी मुलाकात 
इकोनॉमिक्‍स टाइम्‍स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत और चीन व्यापारिक आदान-प्रदान को सुगम बनाने और चीनी निवेश को गति देने के लिए एक नए निवेश ढांचे पर विचार कर रहे हैं. दोनों पड़ोसी मुल्‍क का लक्ष्‍य राजनयिक संबंधों में व्यापक सुधार के बीच ट्रेड रिलेशन को फिर से जिंदा करना है. इस निवेश ढाचे का ऐलान चीन 12-13 सितंबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान कर सकता है. रिपोर्ट में तो यह भी दावा किया गया है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग आएंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। 

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इसी बैठक के दौरान शी जिनपिंग भारत के लिए एक निवेश पैकेज की घोषणा कर सकते हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस मुलाकात की नींव राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल की हाल ही में बीजिंग यात्रा के दौरान रखी गई है और इस दौरे के बाद दोनों देशों के बीच व्‍यापार रिश्‍ते काफी सुधर सकते हैं। 

निवेश ढाचे के तहत क्‍या-क्‍या होगा? 
अनुमान लगाया जा रहा है कि इस ढाचे के तहत समुद्री मार्गों तक आसान पहुंच वाला एक खास आर्थिक क्षेत्र होगा. BYD समेत चीनी इलेक्ट्रिक व्‍हीकल कंपनियों को भारतीय बाजार में ज्‍यादा पहुंच पेश करने की भी संभावना है. एक अन्य प्रस्ताव में चीनी फंडिंग से भारत में एक एक्‍सपोर्ट सेक्‍टर स्थापित करना शामिल है, जिससे तीसरे देशों को निर्यात में सुविधा हो सकती है। 

चीन 2019 के बाद शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा का लाभ उठाकर प्रस्तावित एक्‍सपोर्ट प्रोसेसिंग सेक्‍टर संभावित निवेशों की घोषणा करने के लिए उत्सुक है। 

अभी बहुत बड़ा पैकेज नहीं होगा 
रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल निवेश पैकेज बड़ा नहीं हो सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष छह साल के गतिरोध के बाद धीरे-धीरे संबंधों को सुधारने और मतभेदों को दूर करने पर फोकस कर रहे हैं. भारत गैर-रणनीतिक क्षेत्रों में चीनी निवेश के लिए अपूव प्रॉसेस को और आसान बनाने पर भी विचार कर रहा है, हालांकि वास्तविक नियंत्रण रेखा, रक्षा और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों से संबंधित परियोजनाओं पर प्रतिबंध जारी रहेंगे। 

भारत IT और महत्वपूर्ण कच्चे माल की सुगम उपलब्धता के लिए चीन से आश्वासन मांग रही है. रिपोर्ट के अनुसार, इन आपूर्ति मार्गों को ज्‍यादा विश्वसनीय बनाने और भारतीय उद्योग के लिए पहुंच को मजबूत करने के प्रयास जारी हैं. भारत, चीन से अधिक निवेश और टेक वस्तुओं समेत भारत से आयात बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है, ताकि दोनों देशों के बड़े व्यापार घाटे को कम किया जा सके। 

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