राजनीति

अमित मालवीय की छुट्टी क्यों हुई, बीजेपी की नई टीम में जातीय समीकरण अहम

 नई दिल्ली
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सोमवार (17 अगस्त) को अपने संगठन में बड़ा फेरबदल किया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की इस नई टीम में पिछले 11 साल से भाजपा के आईटी और सोशल मीडिया विभाग का नेतृत्व कर रहे अमित मालवीय की उस पद से छुट्टी कर दी गई है और उनकी जगह छत्तीसगढ़ के दीपक म्हास्के को नया आईटी सेल प्रमुख नियुक्त किया गया है। अब इस बात की अटकलें जोरों पर हैं कि आखिरकार नितिन नवीन ने अपनी नई टीम से अमित मालवीय को क्यों हटा दिया। कुछ लोग इसे 'जेन जेड' (Gen Z) युवाओं के बीच पैठ बनाने की चुनौती और सोशल मीडिया पर कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों से मिल रही कड़ी टक्कर से जोड़कर देख रहे हैं। तो कुछ लोग यूजीसी और राम मंदिर में चंदा चोरी के मामले में भाजपा के किलाफ चले नैरेटिव के मामले सो जोड़कर भी देख रहे हैं। हालांकि, भाजपा सूत्रों ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज किया है

सूत्रों के अनुसार, इस बदलाव को केवल पिछले कुछ महीनों की घटनाओं से जोड़कर देखना गलत होगा क्योंकि मालवीय ने खुद 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों के परिणामों के बाद पार्टी नेतृत्व से उन्हें इस जिम्मेदारी से मुक्त करने की इच्छा जताई थी। उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और पार्टी के अन्य शीर्ष नेतृत्व के साथ अपने भविष्य की भूमिका और नए उत्तराधिकारी के नाम पर विस्तृत चर्चा की थी। NDTV की रिपोर्ट में कहा गया है कि यहां तक कि उनकी जगह उस पद पर नए चेहरे की तलाश के लिए विचार किए गए कई नाम खुद मालवीय द्वारा ही सुझाए गए थे। तो फिर सवाल उठता है कि आखिर वो कौन सी वजहें हैं, जिसके कारण अमित मालवीय को पद से हटना पड़ा है।

जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों का असर
अमित मालवीय उत्तर प्रदेश से आते हैं। उन्होंने हालिया पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में बड़ी और अहम भूमिका निभाई थी, जिससे पार्टी की जीत हुई। वह पश्चिम बंगाल के सह-प्रभारी थे, बावजूद इसके उन्हें संगठन में कोई कोई अन्य बड़ी भूमिका न मिल पाने के पीछे उत्तर प्रदेश के जातीय और क्षेत्रीय समीकरण को एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसे ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक फेरबदल में राज्य को विशेष प्रतिनिधित्व दिया गया है। नई टीम में उत्तर प्रदेश से स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी को महासचिव, जबकि रेखा वर्मा और तारिक मंसूर को उपाध्यक्ष बनाया गया है।

ब्राह्मण कोटे से हरीश द्विवेदी की नियुक्ति
सूत्रों के मुताबिक, हरीश द्विवेदी (जो ब्राह्मण समुदाय से आते हैं) को महासचिव बनाए जाने के बाद, उत्तर प्रदेश से ही आने वाले अमित मालवीय (जो खुद भी ब्राह्मण हैं) को इसी स्तर के पद पर समायोजित करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था। साथ ही, वे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष या सचिव जैसे पदों के लिए अभी उम्र में उतने वरिष्ठ नहीं हैं। इसलिए नई टीम में उन्हें शामिल नहीं किया गया है। हालांकि, पार्टी में उनके भविष्य की भूमिका पर अंतिम फैसला होना अभी बाकी है।

पश्चिम बंगाल में सराहनीय प्रदर्शन
सोशल मीडिया के साथ-साथ अमित मालवीय पिछले छह वर्षों से पश्चिम बंगाल के सह-प्रभारी (co-in-charge) की भूमिका भी निभा रहे थे। पार्टी के भीतर जमीनी स्तर पर काम करने की उनकी क्षमता की काफी सराहना की गई है। इस साल पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) को हराकर भाजपा की पहली बार सरकार बनने में उनके योगदान को काफी सराहनीय माना गया है।

पार्टी का नैरेटिव प्रमुखता से पेश किया
बीजेपी नेताओं के अनुसार, पिछले दशक में मालवीय ने भी कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। विरोधी उन पर विपक्षी दलों के नेताओं के खिलाफ सुनियोजित सोशल मीडिया हमले करने का आरोप लगाते हैं। इसके विपरीत, बीजेपी नेताओं का कहना है कि आईटी सेल प्रमुख के रूप में, मालवीय की जिम्मेदारी न केवल पार्टी और सरकार के नैरेटिव को प्रमुखता से पेश करना था, बल्कि विपक्ष के हमलों का जवाब देना भी था और इसे उन्होंने बखूबी निभाया है।

अमित मालवीय के कार्यकाल में भाजपा का डिजिटल सफर
अमित मालवीय के 11 वर्षों के कार्यकाल के दौरान भाजपा ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी पकड़ बेहद मजबूत की है। उनके नेतृत्व में भाजपा के एक्स (X – पूर्व में ट्विटर) पर 2.3 करोड़ फॉलोअर्स हो चुके हैं, जबकि साल 2013 में भाजपा के केवल 2 से 3 लाख फॉलोअर्स ही हुआ करते थे। इसके मुकाबले मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के पास वर्तमान में 1.1 करोड़ फॉलोअर्स हैं। इसी तरह फेसबुक पर 2013 के 15-20 लाख फॉलोअर्स से बढ़कर भाजपा के अब लगभग 1.6 करोड़ फॉलोअर्स हो चुके हैं, जबकि कांग्रेस के पास 6.7 करोड़ फॉलोअर्स हैं।

नए हेड के सामने क्या चुनौती?
यूट्यूब प्लेटफॉर्म की बात करें तो भाजपा के आधिकारिक चैनल के सब्सक्राइबर्स 20-30 हजार (2013 में) से बढ़कर लगभग 6.3 करोड़ हो चुके हैं, जबकि कांग्रेस के 4.8 करोड़ हैं। इतना ही नहीं उनके नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 100 मिलियन (10 करोड़) से अधिक फॉलोअर्स हैं, जबकि राहुल गांधी के लगभग 27 मिलियन फॉलोअर्स हैं। बहरहाल, BJP ने Instagram पर भी अपनी मौजूदगी मज़बूत करना शुरू कर दिया है। पार्टी की नई सोशल मीडिया टीम के सामने अब Gen Z को अपने साथ जोड़ने और उनसे जुड़ने के बेहतर तरीके खोजने की चुनौती है।

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