बिहार

झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद गहराया, 20 अगस्त को CM आवास घेराव की तैयारी

रांची
 रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम और मोरहाबादी मैदान से लेकर झारखंड विधानसभा तक, जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ छात्रों का ऐतिहासिक आंदोलन लगातार सुलग रहा है।

सरकार ने इस बड़े छात्र आक्रोश को शांत करने, कमजोर करने और आंदोलन को किसी भी तरह खत्म करने के लिए 'साम, दाम, दंड और भेद' की पूरी रणनीति अपनाई। आज की वार्ता निणार्यक होगी। वार्ता फेल होने से 20 अगस्त को सीएम आवास घेरने की तैयारी है।

कई दौर की हाई-लेवल वार्ताएं, परीक्षाओं को रद्द करने के बड़े एलान, उच्च स्तरीय जांच के वादे, पुलिसिया लाठीचार्ज, मुकदमों का डर और धरना स्थल की सुविधाएं बंद करने जैसे तमाम हथकंडों के बावजूद छात्र अपनी मुख्य मांगों (विशेषकर सीबीआई जांच) पर चट्टान की तरह अड़े हुए हैं।

आइए जानते हैं, झारखंड सरकार ने इस आंदोलन को कुचलने या थामने के लिए कौन-कौन से 10 बड़े और कड़े प्रयास किए।

1. कई दौर की उच्चस्तरीय वार्ताएं
सरकार ने डैमेज कंट्रोल के लिए चार मंत्रियों की एक हाई-पावर कमेटी बनाई, जिसने छात्रों के अलग-अलग प्रतिनिधियों के साथ 5 से 6 दौर की लंबी और मैराथन बैठकें कीं।

स्टेट गेस्ट हाउस में कई घंटों तक चली इन बैठकों में सरकार की ओर से हरसंभव बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की गई, ताकि गतिरोध खत्म हो सके। चार मंत्रियों की टीम बनाई गई। तमाम बड़े अधिकारी लगे हैं।

2. प्रमुख परीक्षाएं रद्द करने का बड़ा एलान
छात्रों के भारी दबाव के बाद सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए विवादों में घिरी 14वीं JPSC प्रीलिम्स परीक्षा के साथ-साथ 2023 और 2025 की कई बैकलॉग परीक्षाओं को भी रद करने का औपचारिक एलान किया। सरकार का तर्क था कि इससे छात्रों की सबसे बड़ी व्यावहारिक मांग पूरी हो गई है।

3. '98% मांगें पूरी' होने का दावा
तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार समेत सरकार के तमाम वरिष्ठ अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से बार-बार यह दोहराया कि छात्रों की लगभग 98% मांगें सैद्धांतिक रूप से मान ली गई हैं।

सरकार का यह भी कहना था कि शेष 2% मांगें कानूनी और संवैधानिक अड़चनों के कारण तुरंत पूरी नहीं की जा सकतीं।

4. CID और ED जांच का ठोस प्रस्ताव
आंदोलन की धार को कम करने के लिए सरकार ने आपराधिक गड़बड़ियों की जांच सीआईडी से और बड़े पैमाने पर हुई वित्तीय अनियमितताओं की जांच ईडी से कराने की घोषणा की।

इसके अलावा, मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन और 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने का लिखित वादा भी किया गया।

5. JPSC सदस्यों के इस्तीफे, ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां
आक्रोशित छात्रों को यह संदेश देने के लिए कि सरकार गंभीर है, जेपीएससी के तीन सदस्यों से इस्तीफा दिलवाया गया। सीआईडी जांच तेजी से जारी है।

इसके साथ ही, पूर्व चेयरमैन सहित कई अन्य नामजद आरोपियों को सीआईडी द्वारा गिरफ्तार कर जेल भेजा गया ताकि यह दिखाया जा सके कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

6. विशेष सुधार समिति का गठन
भविष्य में इस तरह की धांधलियों को रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली में बुनियादी सुधार करने का प्रस्ताव रखा गया। इसके लिए आईआईटी-आईएसएम धनबाद, आईआईएम रांची और एक्सएलआरआई जैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के शिक्षाविदों और विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाने का ऐलान किया गया। साथ ही, छात्रों से सीधे सुझाव मांगने के लिए एक विशेष ई-मेल आईडी भी जारी की गई।

7. विधानसभा घेराव से पहले धमकियां, पुलिस कार्रवाई
जब वार्ता के रास्ते फेल होने लगे, तो सरकार ने सख्त रुख अपनाया। विधानसभा घेराव के पूर्व छात्रों को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी गईं। घेराव प्रदर्शन के दौरान भारी पुलिस बल तैनात कर कंटीली तारें लगाई गईं और धारा 163 लागू की गई।

प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया, वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले छोड़े गए, और आंदोलनकारी छात्रों पर बड़े स्तर पर मुकदमे (एफआईआर) दर्ज किए गए।

8. धरना स्थल पर दबाव और प्रशासनिक हथकंडे
छात्र नेताओं का आरोप है कि आंदोलन को मनोवैज्ञानिक रूप से कमजोर करने के लिए धरना स्थल पर प्रशासन ने दबाव बढ़ाना शुरू किया।

रणनीति के तहत धरना स्थल की बिजली काट दी गई, ताकि रात के वक्त छात्रों को अंधेरे और असुविधा का सामना करना पड़े। इसके अलावा, पुलिस बल लगातार कैंप कर दबाव बनाए रहा।

9. छात्रों को घर भेजने के लिए बसें और हेल्पलाइन
आंदोलन को तितर-बितर करने के लिए प्रशासन ने सुदूर जिलों से आए छात्रों को उनके घरों तक वापस भेजने के वास्ते विशेष बसों का इंतजाम किया। इसके लिए अलग-अलग जिलों के लिए प्रशासनिक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए ताकि छात्र अपने घर लौट जाएं और आंदोलन स्वतः दम तोड़ दे।

10. मुख्यमंत्री और मंत्रियों की सीधी अपील
सीएम हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों से युवाओं को संयम बरतने, राजनीति से दूर रहने और परीक्षाओं में सुधार के लिए अपने सुझाव भेजने की अपील की। इसके साथ ही, आंदोलन में बने अलग-अलग छात्र गुटों से सरकार ने अलग-अलग संपर्क साधा, ताकि छात्रों के बीच आपसी एकजुटता और एकता को तोड़ा जा सके।

सीनियर जर्नलिस्ट राकेश परिहार बताते हैं, झारखंड सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम में 'गाजर और छड़ी' की नीति अपनाई। एक तरफ जहां वार्ताओं, रियायतों, उच्च स्तरीय जांच और सुधारों के वादे किए गए।

वहीं दूसरी तरफ लाठीचार्ज, एफआईआर, धरना स्थल की बत्ती काटने और पुलिसिया धमकियों जैसे कड़े प्रशासनिक हथकंडे भी आजमाए गए। हालांकि, सीबीआई जांच जैसी मुख्य मांग पर सरकार के अड़ियल रुख और छात्रों की जिद के कारण यह पूरा चक्रव्यूह बेअसर साबित हुआ और जेपीएससी आंदोलन अब भी जस का तस जारी है।

 

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