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NALSAR विवाद पर CJI की दो टूक- छात्रों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हक, BCI के एक्शन पर जताई नाराजगी

नई दिल्ली

दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की पीठ में हुई सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा 'शांतिपूर्ण और वैध विरोध प्रदर्शन का अधिकार संविधान में सबको है. इसलिए छात्रों को प्रोटेस्ट का पूरा अधिकार है. छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी. अगर युवावस्था में कोई गलत बयान देता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें विरोध करने का अधिकार नहीं है. सभी छात्रों से कहें कि वे नामांकन कराएं और सुप्रीम कोर्ट बार से जुड़ें, हम उन्हें कानूनी सहायता कोर्स के लिए पैनल में शामिल करेंगे। 

सुनवाई के दौरान BCI का दिया हवाला
CJI सूर्यकांत के सामने BCI के कदम का हवाला दिया गया,  दरअसल बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने 13 अगस्त को हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के सभी कानून स्नातकों के एडवोकेट के रूप में नामांकन पर रोक लगाने का निर्देश दिया था. वजह थी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की भागीदारी के विरोध में कथित अभियान, BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के पत्र में NALSAR के कुलपति से यह पता लगाने को कहा गया था कि अभियान शुरू करने, आयोजित करने या छात्रों को इकट्ठा करने में कौन-कौन लोग शामिल थे।  

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BCI ने कथित तौर पर छात्रों, शिक्षकों, रिसर्च स्कॉलर्स, छात्र संगठनों, पूर्व छात्रों और बाहरी लोगों की भूमिका की जानकारी भी मांगी थी. इस आदेश के कुछ ही घंटों बाद BCI ने अपना रुख बदल दिया. BCI ने मामले पर चर्चा के बाद माना कि NALSAR के 2026 बैच के अधिकांश छात्र निर्दोष हैं और वे कथित विरोध अभियान में शामिल नहीं थे, इसलिए पूरे बैच को सजा देना उचित नहीं होगा. नए आदेश के अनुसार NALSAR के सभी 2026 स्नातक अपनी पसंद की राज्य बार काउंसिल में एडवोकेट के रूप में नामांकन करा सकते हैं। 

BCI ने स्पष्ट किया कि किसी छात्र को ऐसी गलती के लिए नुकसान नहीं उठाना चाहिए जिसमें उसकी कोई भूमिका नहीं थी. BCI ने यह भी कहा है कि कुछ शिक्षकों और बाहरी लोगों द्वारा छात्रों को कथित रूप से प्रभावित या उकसाए जाने की जानकारी मिली है. रिपोर्ट मिलने के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है। 

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