
रांची
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ झारखंड के अधिकांश जरूरतमंद परिवारों तक अब भी नहीं पहुंच सका है। इसका सीधा असर यह है कि हजारों परिवार हर महीने महंगा बिजली बिल चुकाने को मजबूर हैं, जबकि केंद्र सरकार रूफटॉप सोलर लगाने पर लाखों रुपये तक की सब्सिडी और लंबे समय तक बिजली खर्च में राहत देने की सुविधा उपलब्ध करा रही है।
पर्याप्त धूप और सौर ऊर्जा की अपार संभावनाओं के बावजूद झारखंड इस योजना के क्रियान्वयन में देश के सबसे पिछड़े राज्यों में शामिल हो गया है।
झारखंड में केवल 3,242 रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए
लोकसभा में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा 29 जुलाई को दी गई जानकारी के अनुसार, फरवरी 2024 में योजना शुरू होने के बाद से अब तक झारखंड में केवल 3,242 रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए गए हैं। इससे महज 3,463 परिवार लाभान्वित हो सके हैं।
इसके विपरीत देशभर में 40.07 लाख घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित हो चुके हैं और 48.22 लाख परिवारों को योजना का लाभ मिल चुका है। केंद्र सरकार का लक्ष्य वर्ष 2026-27 तक एक करोड़ घरों को इस योजना से जोड़ना है।
सिर्फ 360 उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य
पूर्वी भारत में झारखंड का प्रदर्शन भी बेहद निराशाजनक रहा है। असम में 1.59 लाख, ओडिशा में 1.41 लाख, छत्तीसगढ़ में 84,317 और बिहार में 24,755 परिवार योजना से जुड़ चुके हैं। झारखंड केवल पश्चिम बंगाल (3,132 परिवार) से थोड़ा आगे है।
आंकड़े बताते हैं कि झारखंड में अब तक सिर्फ 360 उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य हुआ है।
प्रक्रियागत अड़चनें योजना की रफ्तार रोक रही
विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता की कमी, बैंक ऋण मिलने में देरी, अधिकृत वेंडरों की सीमित संख्या और बिजली वितरण कंपनियों के स्तर पर प्रक्रियागत अड़चनें योजना की रफ्तार रोक रही हैं। यदि इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो बड़ी संख्या में परिवार सस्ती और स्वच्छ बिजली के साथ केंद्र सरकार की सब्सिडी के लाभ से भी वंचित रह जाएंगे।
इसके विपरीत देशभर में 40.07 लाख घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित हो चुके हैं और 48.22 लाख परिवारों को योजना का लाभ मिल चुका है। केंद्र सरकार का लक्ष्य वर्ष 2026-27 तक एक करोड़ घरों को इस योजना से जोड़ना है।
पश्चिम बंगाल से थोड़ा आगे झारखंड
पूर्वी भारत में झारखंड का प्रदर्शन भी बेहद निराशाजनक रहा है। असम में 1.59 लाख, ओडिशा में 1.41 लाख, छत्तीसगढ़ में 84,317 और बिहार में 24,755 परिवार योजना से जुड़ चुके हैं। झारखंड केवल पश्चिम बंगाल (3,132 परिवार) से थोड़ा आगे है।
आंकड़े बताते हैं कि झारखंड में अब तक सिर्फ 360 उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता की कमी, बैंक ऋण मिलने में देरी, अधिकृत वेंडरों की सीमित संख्या और बिजली वितरण कंपनियों के स्तर पर प्रक्रियागत अड़चनें योजना की रफ्तार रोक रही हैं। यदि इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो बड़ी संख्या में परिवार सस्ती और स्वच्छ बिजली के साथ केंद्र सरकार की सब्सिडी के लाभ से भी वंचित रह जाएंगे।






