
आज की भागदौड़ वाली जिंदगी में बदलते लाइफस्टाइल के कारण भारतीयों का शरीर धीरे धीरे बीमारियों का घर बनता जा रहा है. जिसके कारण भारतीयों की लाइफ एक्सपेक्टेंसी कुल 60 से 70 साल रह गई है. लेकिन, क्या आपको पता है कि महाभारत काल में लोग आज के मुकाबले ज्यादा लंबी उम्र जीते थे. कहा जाता है कि उस दौर में कई लोग 80-90 साल से भी ज्यादा जिए थे. कुछ मान्यताओं के मुताबिक यह भी बताया गया है कि उस समय दिन और साल की गणना आज के समय से अलग थी, जिससे उस युग का रहस्य और भी बढ़ जाता है.
महाभारत ग्रंथ के मुताबिक, भगवान कृष्ण भी 100 साल से ज्यादा जिए थे. उनकी लंबी उम्र का कारण आध्यात्मिक जीवन, अनुशासन, योग और सात्विक आहार था. वहीं, आज के समय में भी पूरी दुनिया में कई ऐसे लोग हैं जो 100 साल से ज्यादा जीते हैं. उनकी लाइफस्टाइल भी इन्हीं चीजों पर निर्भर करती है.
इसी काल में कई महान योद्धा हुए, जिनमें खासतौर पर द्रोणाचार्य और भीष्म पितामह अपनी लंबी उम्र के लिए सबसे ज्यादा जाने जाते हैं. कहते हैं कि भीष्म पितामह को तो इच्छामृत्यु का वरदान मिला हुआ था. कहा जाता है कि महाभारत युद्ध में गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी उन्होंने करीब 20 दिन तक प्राण नहीं त्यागे थे और फिर अपनी इच्छा से देह त्याग दिया था.
लंबी उम्र जीने के पीछे के सीक्रेट
गुरु द्रोणाचार्य
गीता के मुताबिक, द्रोणाचार्य की लंबी उम्र का श्रेय उनके योग, व्यायाम, युद्ध-कला और सादगी भरे जीवन को जाता है. द्रोणाचार्य युद्ध-कला के महान आचार्य थे और कौरव-पांडव के गुरु भी थे. उनके बारे में कहा जाता है कि वे अच्छा आहार लेते थे. इसी वजह से उनका शरीर मजबूत रहता था.
भीष्म पितामह
वहीं भीष्म पितामह, जिनकी उम्र अलग-अलग ग्रंथों में 110 से 120 साल के बीच बताई गई है. उन्होंने अपना पूरा जीवन एक ऋषि की तरह सख्त अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के साथ जीया था. भीष्म पितामह का सादा जीवन भी उनकी सेहत बनाए रखने में बड़ा कारण माना जाता है. उस समय खानपान में प्राकृतिक और शुद्ध चीजों को ज्यादा महत्व दिया जाता था. जो लंबी उम्र के लिए फायदेमंद मानी जाती थीं. इसके अलावा, इनका आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करना भी इनकी फिटनेस का राज था.
कहा जाता है कि दोनों ही योद्धाओं ने कठिन अभ्यास और बढ़िया अनुशासन के कारण इतनी लंबी उम्र पाई थी. वे अपने कर्तव्यों को पूरी लगन से निभाते थे. दोनों एक हर दिन के तय दिनचर्या का पालन करते थे, जिससे उनका शरीर फिट और मन साफ रहता था.
क्या खाते थे भीष्म पितामह?
महाभारत ग्रंथ के अनुसार, भीष्म पितामह सात्विक आहार लेते थे. उनके खाने में ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, मेवे और दूध-घी जैसी चीजें शामिल थीं. कहा जाता है कि भीष्म बहुत नियंत्रित तरीके से भोजन करते थे और कभी भी जरूरत से ज्यादा नहीं खाते थे. यह आदत उन्हें स्वास्थ्य रखने और बीमारियों से बचाने में मदद करती थी. इन्हीं मान्यताओं के अनुसार पता चलता है कि भीष्म पितामह नॉन वेज नहीं खाते थे.
ये थीं दिनचर्या
माना जाता है कि महाभारत काल में लोग साफ-सुथरे माहौल, अच्छे लाइफस्टाइल और शारीरिक अनुशासन की वजह से लंबी उम्र जीते थे. कहा जाता है कि उस दौर में लोग 100 साल की उम्र में भी उतने ही फिट रहते थे, जितने आज के समय में 70 साल के लोग होते हैं.
इसी तरह एक और महान ऋषि थे वेदव्यास, जिन्हें महाभारत का रचयिता माना जाता है. प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, उनकी उम्र करीब 130 साल तक बताई जाती है. वेदव्यास का जन्म सत्यवती और ऋषि पराशर से हुआ था, और उनके जन्म से जुड़ी एक अनोखी और प्रसिद्ध कहानी भी सुनने को मिलती है.
पांडवों की क्या थी उम्र?
वैसे तो पांडवों की उम्र का कोई पुख्ता सबूत नहीं है. लेकिन, पांडवों के बड़े भाई युधिष्ठिर की 90 से 100 साल तक जिए थे. वहीं, भीम इनसे 1 से 2 साल छोटे थे, अर्जुन 3 से 4 साल छोटे थे और नकुल-सहदेव अर्जुन से 10 से 15 छोटे थे. महाभारत युद्ध के दौरान युधिष्ठिर की उम्र करीब 70 से 75 साल की थी. युद्ध के बाद, पांडवों ने हस्तिनापुर पर 36 साल तक शासन किया था, जिसके बाद उन्होंने अपनी स्वर्ग की यात्रा शुरू की थी.
धृतराष्ट्र की क्या उम्र थी?
महाभारत ग्रंथ के मुताबिक, धृतराष्ट्र का जन्म नियोग प्रथा से हुआ था, जिसमें ऋषि वेदव्यास ने राजा विचित्रवीर्य की मृत्यु के बाद उन्हें जन्म दिया. वे पांडु और विदुर के बड़े भाई थे. माना जाता है कि महाभारत युद्ध के समय उनकी उम्र करीब 90-100 साल के बीच थी. इससे इस बात अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस समय दुर्योधन और उसके भाई-बहन करीब 50-60 साल के थे.
युद्ध के बाद धृतराष्ट्र, गांधारी और कुंती के साथ लगभग 15 साल तक हस्तिनापुर में रहे. इसके बाद वे जंगल में चले गए (वनवास ले लिया), जहां 2-3 साल बाद जंगल में लगी आग में उनकी मृत्यु हो गई बताई जाती है.
महाभारत काल में एक साल कितने समय का होता था?
जानकारी के मुताबिक, महाभारत काल में साल की गणना चंद्र और सूर्य दोनों के आधार पर होती थी, यानी समय को चांद और सूरज दोनों के हिसाब से माना जाता था.
चंद्र वर्ष करीब 354 दिनों का होता था, जिसमें 12 महीने होते थे. उस वक्त का हर महीना लगभग 29-30 दिन का माना जाता है. इस साल को सौर वर्ष के साथ संतुलित रखने के लिए बीच-बीच में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता था, जिसे अधिक मास कहा जाता है.






