
रायपुर। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजधानी की पश्चिम विधानसभा में कांग्रेस के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। टिकट की दौड़ में अब दो बड़े चेहरे खुलकर सामने आ चुके हैं। एक नेता लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहकर जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटा है, तो दूसरा नेता प्रदेश से बाहर अन्य राज्यों और अपने पुराने विधानसभा क्षेत्र में ज्यादा सक्रिय दिखाई दे रहा है। ऐसे में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है — आखिर टिकट किसे मिलेगा?
सूत्रों की मानें तो कांग्रेस हाईकमान इस बार सिर्फ पुराने चेहरे या बड़े नाम के भरोसे टिकट नहीं बांटना चाहता, बल्कि जमीनी सक्रियता, संगठन में पकड़ और जनता के बीच स्वीकार्यता को प्राथमिकता देने की तैयारी में है। हाल ही में कांग्रेस संगठन द्वारा विधायकों और संभावित दावेदारों का रिपोर्ट कार्ड तैयार किए जाने की चर्चा भी तेज है।
पश्चिम विधानसभा में एक दावेदार लगातार क्षेत्रीय कार्यक्रमों, सामाजिक आयोजनों और कार्यकर्ताओं की बैठकों में सक्रिय नजर आ रहा है। मोहल्लों से लेकर वार्ड स्तर तक उसकी मौजूदगी चर्चा में है। पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग भी इसी नेता को “ग्राउंड पर मजबूत” मान रहा है।
वहीं दूसरा दावेदार लंबे समय से बड़े राजनीतिक संपर्क और संगठनात्मक अनुभव के भरोसे टिकट की उम्मीद लगाए बैठा है। लेकिन विरोधी खेमे का आरोप है कि उनका फोकस पश्चिम विधानसभा से ज्यादा दूसरे राज्यों और अपने पुराने विधानसभा क्षेत्र पर बना हुआ है। यही कारण है कि स्थानीय कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान तेजपश्चिम विधानसभा की राजनीति अब केवल टिकट की दावेदारी तक सीमित नहीं रह गई है। अंदरखाने समर्थकों के बीच शक्ति प्रदर्शन भी शुरू हो चुका है। सोशल मीडिया से लेकर बैठकों तक दोनों खेमे अपनी ताकत दिखाने में जुटे हैं।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर कांग्रेस ने समय रहते स्थिति नहीं संभाली, तो अंदरूनी गुटबाजी चुनाव में नुकसान पहुंचा सकती है। हालांकि पार्टी नेतृत्व इस बार “विनिंग फेस” पर दांव लगाने के मूड में दिखाई दे रहा है।





