
भोपाल
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा और खतरनाक कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन भोपाल में इसका पालन आसान नहीं दिख रहा। निगम के आंकड़ों के मुताबिक शहर में करीब 1.20 लाख आवारा कुत्ते हैं, लेकिन शहर में एक भी डॉग शेल्टर नहीं है। अगले कुछ महीनों में इसके बनने की उम्मीद भी नहीं है।
आवारा कुत्तों की नसबंदी और वैक्सीनेशन पर निगम पिछले पांच साल में 8.5 करोड़ रुपए खर्च कर चुका है। फिर भी रोजाना डॉग बाइट के शिकार करीब 81 लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। 15 शिकायतें निगम में रोज आ रही हैं। इनमें सबसे ज्यादा बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। रात के समय कई इलाकों में बाइक सवारों और पैदल लोगों का निकलना मुश्किल हो रहा है।
शेल्टर होम होगा आवारा श्वानों का ठिकाना
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई श्वान खतरनाक या रेबीज से संक्रमित पाया जाता है, तो उसे इंजेक्शन देकर समाप्त किया जा सकता है। साथ ही अदालत ने नवंबर 2025 में जारी पुनर्वास और नसबंदी संबंधी निर्देशों को प्रभावी बताते हुए कहा है कि इनका पालन नहीं करने वाले अधिकारियों पर अवमानना की कार्रवाई हो सकती है।
810 नो डॉग जोन बनने थे, पर यहां से एक भी कुत्ता नहीं हटा
पिछले साल भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और खेल परिसरों समेत 810 सार्वजनिक जगहों को ‘नो-डॉग जोन’ के रूप में चिह्नित किया था। दावा था कि यहां से कुत्तों को हटाया जाएगा, लेकिन शेल्टर होम नहीं होने के कारण अब तक एक भी कुत्ता नहीं हटाया गया।
शहर में सवा लाख से ज्यादा आवारा श्वान
नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार भोपाल में आवारा श्वानों की संख्या सवा लाख से अधिक है। इसके मुकाबले हर साल केवल 20 से 25 हजार श्वानों की ही नसबंदी हो पाती है।
वर्ष 2024-25 में निगम ने 21,452 श्वानों की नसबंदी और 26,427 श्वानों का एंटी-रेबीज टीकाकरण किया, जिस पर करीब 2.35 करोड़ रुपये खर्च हुए। वहीं वर्ष 2025-26 में फरवरी तक 23,363 श्वानों की नसबंदी और 29,766 श्वानों का टीकाकरण किया जा चुका है। इस पर 2.56 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए।
इसके बावजूद शहर में श्वानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हिंसक और संक्रमित श्वानों पर नियंत्रण की कार्रवाई तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
इन इलाकों में ज्यादा खतरा अशोका गार्डन, अयोध्या बायपास, पिपलानी, कोहेफिजा, शाहजहांनाबाद, करोंद, मीनाल रेसीडेंसी, पटेल नगर, छोला, बैरागढ़, लालघाटी-हलालपुर रोड, रेलवे स्टेशन, आईएसबीटी और न्यू मार्केट के आसपास रात में कुत्तों के झुंड सबसे ज्यादा दिखाई दे रहे हैं। कई जगह फुटपाथों पर कुत्तों के डेरों के कारण पैदल निकलना मुश्किल हो रहा है।
600 कुत्तों की क्षमता, डॉग सवा लाख जानकारी के अनुसार नगर निगम के पास फिलहाल अरवलिया, आदमपुर छावनी और कजलीखेड़ा में तीन एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर हैं। तीनों की कुल क्षमता सिर्फ 600 कुत्तों की है। यहां रोज 20 से 25 कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण हो रहा है। ये सेंटर केवल नसबंदी के लिए हैं, जबकि कोर्ट के निर्देश के मुताबिक स्थायी डॉग शेल्टर एक भी नहीं है।
अब तक इतनी नसबंदी पिछले 5 साल में नगर निगम ने नसबंदी और टीकाकरण पर 8.56 करोड़ रुपए खर्च किए। इस दौरान 81,207 कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का दावा किया गया, लेकिन शहर में डॉग बाइट और आवारा कुत्तों की शिकायतें लगातार बढ़ती रहीं।
इंदौर में अप्रैल में हर दिन 146 केस इंदौर में अप्रैल के 24 दिनों (24 अप्रैल तक) में डॉग बाइट के 3493 मामले सामने आए हैं। यानी औसतन करीब 146 केस प्रतिदिन दर्ज किए गए हैं। जनवरी में 5198, मार्च में 5109 मामले आए थे। वहीं दिसंबर में 5471 केस थे।
शहर में तीन एबीसी सेंटर संचालित
फिलहाल भोपाल में कजलीखेड़ा, अरवलिया गोशाला के पीछे और आदमपुर कचरा खंती क्षेत्र में एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। प्रत्येक सेंटर की क्षमता करीब 150 श्वानों की है।
नगर निगम की टीमें रोजाना शहर के अलग-अलग इलाकों से 50 से 65 आवारा श्वानों को पकड़कर नसबंदी और उपचार के लिए इन केंद्रों तक पहुंचा रही हैं।
एमपी में डॉग बाइट के इतने आंकड़े पूरे मध्यप्रदेश में कुत्तों के काटने का खतरा बना रहता है। कई इलाके ऐसे हैं, जहां कुत्तों के डर से बच्चे घरों के बाहर खेलने तक नहीं जाते। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के 2024 के आंकड़े बताते हैं कि मध्यप्रदेश में 10.09 लाख से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं। इनमें से 6 लाख से अधिक बड़े शहरों इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर में हैं।
9 लोगों की रेबीज से मौत भी हुई केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022 से जनवरी 2025 तक प्रदेश में करीब 3.39 लाख डॉग बाइट के मामले सामने आए हैं। इनमें 2022 में 66,018, 2023 में 1,13,499, 2024 में 1,42,948 और 2025 (जनवरी) में 16,710 मामले दर्ज हुए। इसी अवधि में कम से कम 9 लोगों की रेबीज से मौत भी हुई है।
देशभर के आंकड़ों से तुलना करें तो मध्यप्रदेश डॉग बाइट मामलों में शीर्ष राज्यों में शामिल है, जहां हर साल मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हो रही है। 2022 में जहां करीब 21.89 लाख मामले देशभर में थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 37.15 लाख से अधिक हो गई।
गर्मी में क्यों बढ़ते हैं कुत्तों के हमले पशु चिकित्सक एसआर नागर के मुताबिक गर्मी का मौसम कुत्तों के व्यवहार को आक्रामक बना देता है। कुत्तों के शरीर में स्वेट ग्लैंड (पसीना निकालने वाले छिद्र) नहीं होते, इसलिए वे इंसानों की तरह शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं कर पाते।
इस वजह से उनमें चिड़चिड़ापन और आक्रामकता बढ़ जाती है। अगर उन्हें खाने-पीने की कमी हो या किसी तरह का खतरा महसूस हो, तो वे तुरंत हमला कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अप्रैल से जून के बीच तापमान बढ़ने के साथ डॉग बाइट के मामलों में और तेजी आ सकती है। इस दौरान कुत्तों के खाने-पीने का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्हें पर्याप्त पानी देना और तेज धूप से बचाना जरूरी है, ताकि उनका व्यवहार शांत बना रहे।






