
पटना.
अटल पेंशन योजना (एपीवाई) में निम्न आय-वर्ग के लोगों की अभिरुचि इस कदर है कि इसकी अवधि वित्तीय वर्ष 2030-2031 तक बढ़ाई जा चुकी है। बिहार ने इस योजना को सिर-आंखों पर लिया और अब तक 80 लाख लोग इसमें पंजीकरण करा चुके हैं। पंजीकृत लोगों में 46 लाख से अधिक महिलाएं हैं। इस संख्या के साथ एपीवाई में बिहार देश में दूसरे स्थान पर है। इससे आगे एकमात्र उत्तर प्रदेश है, जिसकी जनसंख्या बिहार से लगभग दोगुनी अधिक है।
एपीवाई से निम्न आय-वर्ग और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए वृद्धावस्था में निश्चित आय का उपाय किया गया है। सरकार मानती है कि इसके जरिये एक पेंशन आधारित समाज बनाया जा सकता है, जो कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्यों को पूरा करने में सहायक होगा। विकसित भारत की तर्ज पर बिहार भी विकास की अवधारणा रखता है और उसके लिए एपीवाई जैसे छोटे-छोटे प्रयासों को बेहद कारगर माना जा रहा है। बहरहाल बिहार में एपीवाई के अंतर्गत हुए पंजीकरण में महिलाओं की संख्या 58 प्रतिशत के लगभग है। इससे स्पष्ट है कि राज्य में महिला सशक्तीकरण की पहल नियोजित तरीके से आगे बढ़ रही है। उल्लेखनीय है कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, जैसे कि किसान, सब्जी विक्रेता, ऑटो चालक और छोटे व्यवसायी इस योजना के मुख्य ग्राहक हैं। अगले पांच वर्षों के लिए अवधि-विस्तार के बाद इसमें और पंजीकरण की आशा है। पेंशन लाभ 2035 से प्राप्त होने की आशा है।
पेंशन और आश्रित के लिए प्रविधान
एपीवाई की शुरुआत नौ मई, 2015 को हुई थी। इसके अंतर्गत 60 वर्ष की आयु के बाद एक से पांच हजार रुपये न्यूनतम पेंशन की गारंटी है। पेंशन की यह राशि लाभार्थी द्वारा किए गए निवेश की मात्रा पर निर्भर करती है। मृत्यु या गंभीर बीमारी की स्थिति में समय पूर्व निकासी हो सकती है। एक अक्टूबर, 2022 से आयकर-दाताओं को इस योजना से बाहर कर दिया गया। इसके अलावा पंजीकृत व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात पति/पत्नी को भी पेंशन का प्रविधान है। दोनों की मृत्यु के बाद उत्तराधिकारी यानी नामिनी को जमा राशि वापस मिल जाती है।
एपीवाई के अंतर्गत पंजीकरण
एपीवाई (APY) के अंतर्गत पंजीकरण क्षेत्र
कुल संख्या महिलाएं
बिहार 79,69,799 46,06,393
भारत 8,71,74,743 4,25,13,682






