मध्यप्रदेश

नई गाइडलाइन के तहत प्रदेश में LPG गैस सिलेंडर वितरण, कोटा निर्धारित

भोपाल 

मध्यप्रदेश सरकार ने गैस सिलेंडरों के वितरण का कोटा तय कर दिया है। घरेलू उपभोक्ताओं को पहले की तरह 100 प्रतिशत आपूर्ति मिलती रहेगी। वहीं, शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्रों को संबंधित जिले में उपलब्ध कमर्शियल गैस के कुल स्टॉक में से 30 प्रतिशत आपूर्ति देने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार का मानना है कि ऐसे में दोनों क्षेत्रों की जरूरत पूरी हो सकेगी। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के उप सचिव बीके चंदेल ने सभी कलेक्टरों को इस संबंध में निर्देश जारी किए। इससे पहले विभागीय मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और अपर मुख्य सचिव रश्मि अरुण शमी ने गैस व पेट्रोल-डीजल आपूर्ति की समीक्षा की। सरकार ने कहा कि जमाखोरी या कालाबाजारी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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तय कर दिया गया सबका कोटा
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, सुरक्षा एजेंसियां, पुलिस, एयरपोर्ट, रेलवे, दीनदयाल रसोई, जेल, सामाजिक न्याय विभाग और महिला-बाल विकास को 35 प्रतिशत सिलेंडर मिलेगा। होटल क्षेत्र को 9 प्रतिशत, रेस्टोरेंट व केटरिंग को भी समान आपूर्ति तथा ढाबा व स्ट्रीट फूड वेंडरों को 7 प्रतिशत आपूर्ति होगी। उद्योगों में फार्मास्यूटिकल, फूड प्रोसेसिंग, पोल्ट्री फीड व सीड प्रोसेसिंग क्षेत्र को 5 प्रतिशत और अन्य उद्योगों को भी इतनी ही मात्रा में सिलेंडर दिए जाएंगे।

किया जाएगा निरिक्षण
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जमाखोरी, अवैध भंडारण और कालाबाजारी को रोकने के लिए जिला प्रशासन द्वारा नियमित रूप से निरीक्षण किया जाएगा। आवश्यक वस्तु अधिनियम सहित अन्य संबंधित कानूनों के तहत नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

राज्य सरकार ने संस्थानों और प्रतिष्ठानों को अस्थायी रूप से वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया है, ताकि गैस की उपलब्धता का संतुलन बनाए रखा जा सके। यह नई व्यवस्था अगले आदेश तक लागू रहेगी, जिससे आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए आम आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू रखा जा सके।

कमर्शियल गैस सिलिंडरों की दिक्कत
राजधानी में अभी भी कमर्शियल गैस सिलिंडरों की किल्लत हो रही है। बीते दो सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आपूर्ति व्यवस्था सामान्य नहीं हो सकी है। अब इसका सीधा असर होटल, रेस्तरां और छोटे ढाबा संचालकों पर पड़ रहा है। कारोबार चौपट होने की कगार पर पहुंच चुका है, जिससे व्यापारियों में नाराजगी बढ़ रही है।

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