मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी में महिलाओं की हिस्सेदारी 3 साल में ढाई फीसदी बढ़ी, आधी दुनिया की ताकत में इजाफा

भोपाल 

मप्र में पुरुषों के मुकाबले सरकारी नौकरी में महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। बीते तीन साल में ही बढ़ोतरी तकरीबन ढाई प्रतिशत देखी गई। जबकि पुरुषों का प्रतिशत घट गया। आर्थिक सांख्यिकी विभाग की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।

खास बात यह है कि क्लास-वन, क्लास-टू और क्लास-थ्री श्रेणी में महिलाओं की संख्या बीते वर्षों की तुलना में बढ़ी है। ये सब श्रेणियां अफसर के स्तर की होती हैं। तीनों में प्रतिशत 30 से ऊपर है, जबकि चतुर्थ श्रेणी में प्रतिशत 20.54 है। क्लास-टू में तो आंकड़ा 33 प्रतिशत से भी अधिक हो गया है। प्रदेश के कुल 22 विश्वविद्यालयों में जरूर महिलाओं की संख्या घटी है।

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दो विवि ग्वालियर के राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विवि और महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विवि उज्जैन में तो एक-एक ही महिला रह गई हैं। भोपाल के राष्ट्रीय विधि संस्थान विवि (एनएलआईयू) में सिर्फ तीन महिलाएं हैं। यह दस फीसदी से भी कम है। सर्वाधिक 37 से अधिक महिलाएं भोपाल के हिंदी विवि में हैं।

नौकरियां घटीं… 2024 के मुकाबले 2025 में 16,396 नौकरी कम हुईं

रिपोर्ट में यह जानकारी भी सामने आई कि सरकार के 54 विभागों में एक मार्च 2024 से एक मार्च 2025 के बीच सिर्फ 282 लोगों को नियमित (रेग्यूलर) नौकरी मिली है। यानी आंकड़ा 6 लाख 6 हजार 876 से बढ़कर 6 लाख 7 हजार 158 हुआ जो सिर्फ 0.05 प्रतिशत बढ़ोतरी बता रहा है।

दूसरी तरफ सरकारी नौकरी से इतर राज्य के सार्वजनिक उपक्रम व अर्द्धशासकीय संस्थाओं में संख्या 3447 घट गई। पांच सालों में 2021 से 2025 के बीच सार्वजनिक उपक्रम व अर्द्धशासकीय संस्थाओं में 15 हजार लोगों की नौकरी घटी है। यही हाल नगरीय निकायों का भी है।

यहां 450 नौकरी कम हुई। ग्रामीण निकायों में 38, विकास प्राधिकरण व विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण में 98 और विवि में 130 नौकरियां कम हुई हैं। तमाम वर्गों को देखें तो 2024 के मुकाबले मप्र में 2025 में 16 हजार 396 नौकरी कम हुई है।

नियमित कर्मचारी… भोपाल-इंदौर में और स्कूल शिक्षा में सर्वाधिक सरकार के नियमित कर्मचारियों में 39.8% जिलों में काम करते हैं। इसमें भोपाल में सर्वाधिक नियमित कर्मियों की संख्या 6.65% है। दूसरे नंबर पर इंदौर 4.47, फिर ग्वालियर 3.50 और धार 3.36 प्रतिशत है। इसी तरह प्रदेश में कुल नियमित कर्मचारियों में सर्वाधिक 37.66% लोग स्कूल शिक्षा विभाग में पदस्थ हैं।

दूसरा नंबर गृह विभाग का है, जहां 15.18% लोग हैं। इसके बाद तीसरे और चौथे नंबर पर क्रमश आदिम जाति व अनुसूचित जाति कल्याण एवं लोक स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग आते हैं।

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