छत्तीसगढ़

औषधीय व सुगंधित फसलों की ओर आकर्षित हुए किसान, मेले में दिखा उत्साह

रायपुर.

किसान मेले में औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती के प्रति किसानों में बढ़ी रूझान

औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती में किसानों की रुचि तेजी से बढ़ी है, जिसका मुख्य कारण पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक लाभ, कम लागत और बाजार में मांग है। अश्वगंधा, लेमनग्रास, तुलसी और खस जैसी फसलों से किसान प्रति एकड़ अच्छी कमाई कर रहे हैं, जिसमें सरकार की सब्सिडी और तकनीकी सहायता भी मदद कर रही है। 
 किसान मेले में औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती के प्रति किसानों में बढ़ी रूझान
 
औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती को बढ़ावा

छत्तीसगढ़ युवा प्रगतिशील किसान संघ द्वारा आयोजित किसान मेले में छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड ने सक्रिय सहभागिता की। कुम्हारी, दुर्ग में 30-31 जनवरी को आयोजित दो दिवसीय किसान मेले में बोर्ड द्वारा लगाए गए स्टॉल के माध्यम से औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती को बढ़ावा देने हेतु संचालित शासकीय योजनाओं एवं कार्यों की जानकारी दी गई। 

किसान मेले में औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती के प्रति किसानों में बढ़ी रूझान

कार्यक्रम में केन्द्रीय कृषि मंत्री  शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा, कृषि मंत्री  रामविचार नेताम, वन मंत्री  केदार कश्यप, वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी, शिक्षा मंत्री  गजेन्द्र यादव, सांसद दुर्ग  विजय बघेल सहित कृषि विभाग एवं अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

किसानों के विशेष आकर्षण का केंद्र लेमनग्रास की खेती

स्टॉल पर विभिन्न आकर्षक मॉडलों के माध्यम से खेती के सफल उदाहरण प्रस्तुत किए गए। इनमें नदी किनारे की रेतीली एवं अनुपयोगी भूमि पर खस की खेती, महिला सशक्तिकरण के लिए घरों की बाड़ी में सिंदूरी, सतावर एवं ब्राह्मी का रोपण तथा धान की खेती के कन्वर्जेंस के रूप में लेमनग्रास की खेती के मिनिएचर मॉडल शामिल रहे। ये मॉडल किसानों एवं आमजनों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बने।

औषधीय एवं सुगंधित पौधे मच्छर एवं कीट-पतंगों को दूर भगाने में सहायक

उल्लेखनीय है कि इस किसान मेले में बोर्ड द्वारा औषधीय एवं सुगंधित पौधों से तैयार उत्पादों का निःशुल्क वितरण भी किया गया। अनंतमूल की जड़ से तैयार नन्नारी शरबत किसानों एवं आमजनों परोसा गया, जो शरीर को आंतरिक रूप से ठंडक प्रदान करता है और ग्रीष्म ऋतु में लू से बचाव में सहायक है। इसके साथ ही लेमनग्रास तेल की 10 मि.ली. शीशियों का निःशुल्क वितरण किया गया। लेमनग्रास तेल का उपयोग मानसिक शांति, सुगंधित वातावरण बनाने, मच्छर एवं कीट-पतंगों को दूर भगाने तथा तेल में मिलाकर मालिश के लिए किया जाता है। किसान मेले में लगभग 1000 से 1500 किसानों एवं आमजनों ने बोर्ड के स्टॉल से जानकारी प्राप्त की तथा नन्नारी शरबत और लेमनग्रास तेल के फायदे के बारे में विस्तृत जानकारी।

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