बाज़ार

कीमती धातुओं की उछाल, जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर की वित्त मंत्री से मांगें क्या हैं

नई दिल्ली

भारत का जेम्स एंड ज्वेलरी उद्योग बजट 2026-27 से कुछ ठोस कदमों की उम्मीद कर रहा है ताकि बढ़ती कीमतों, वैश्विक अनिश्चितता और बदलती ग्राहक पसंद के दौर में इस क्षेत्र को मजबूती मिल सके। सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं, जिससे गहने आम उपभोक्ता की पहुंच से दूर होते जा रहे हैं।

सोने-चांदी की कीमतों में तेज उछाल

इस साल अब तक सोने की कीमतों में लगभग 17% की बढ़ोतरी हुई है, जो पिछले साल 64% के उछाल के बाद आई है। चांदी की कीमतों में पिछले साल 147% का भारी उछाल देखा गया। इसका कारण सुरक्षित निवेश की मांग, केंद्रीय बैंकों की खरीद, अमेरिकी मौद्रिक नीति में ढील और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स में रिकॉर्ड निवेश है।
उपभोक्ता मांग स्थिर, लेकिन सतर्क

सोने-चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद उपभोक्ताओं की मांग बनी हुई है, हालांकि अब वे ज्यादा सोच-समझकर खरीदारी कर रहे हैं। यह दर्शाता है कि भारत में गहने सिर्फ एक भावनात्मक खरीद ही नहीं, बल्कि पैसे जमा करने का एक जरिया भी हैं।

सेंको गोल्ड के सीईओ की सलाह

सेंको गोल्ड के एमडी एवं सीईओ सुवांकर सेन का कहना है कि आने वाले साल में गहनों की किफायती पहुंच अहम होगी। उन्होंने छोटे टिकट वाले ईएमआई विकल्पों को विनियमित करने और ज्वेलरी पर मौजूदा 3% जीएसटी दर की समीक्षा का सुझाव दिया है। साथ ही, 6% सोना आयात शुल्क पर पुनर्विचार, कारीगरों के लिए प्रशिक्षण, तकनीक अपनाने और घरेलू मांग पूरी करने के लिए एसईजी इकाइयों को लचीलेपन की जरूरत बताई है।

निर्यातकों की चिंता और मांग

स्काई गोल्ड एंड डायमंड्स के एमडी मंगेश चौहान के मुताबिक, उद्योग वैश्विक चुनौतियों के बीच लागत कम करने और व्यवसाय में आसानी के लिए समझदारी भरी सुधारों की मांग कर रहा है। आयात शुल्क में तर्कसंगत कमी, सीमा शुल्क प्रक्रिया को आसान बनाने, जीएसटी को घटाकर 1 से 1.25% करना और टूरिस्ट जीएसटी रिफंड स्कीम को जल्द लागू करना उनकी प्रमुख मांगें हैं।

मलाबार ग्रुप के अध्यक्ष का नजरिया

मलाबार ग्रुप के चेयरमैन एम.पी. अहमद उम्मीद जताते हैं कि पिछले साल सोने के आयात शुल्क में कटौती के बाद इस बार भी नीतिगत निरंतरता बनी रहेगी। वह सोने के मुद्रीकरण योजना को और आकर्षक बनाने पर जोर देते हैं ताकि घरों में पड़े सोने को अर्थव्यवस्था में लगाया जा सके और आयात निर्भरता घटे।

हीरे के कारोबार की अपेक्षाएं

डिवाइन सॉलिटेयर्स के एमडी जिग्नेश मेहता कहते हैं कि नेचुरल डायमंड पर 5% आयात शुल्क घटाकर 2.5% किया जाना चाहिए, जिससे निर्यात, रोजगार और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, प्राकृतिक और लैब-ग्रोन डायमंड में अंतर स्पष्ट करने वाली बीआईएस अधिसूचना एक सही कदम थी।

लैब-ग्रोन डायमंड को बढ़ावा

लुकसन के सीईओ आनंद लुखी मानते हैं कि बजट में लैब-ग्रोन डायमंड को एक रणनीतिक क्षेत्र के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए। कच्चे माल और मशीनरी पर शुल्क में कमी, अपग्रेडेड मैन्युफैक्चरिंग के लिए प्रोत्साहन और एमएसएमई को आसान कर्ज मुहैया कराना इसके विकास के लिए जरूरी है।
भविष्य की राह

जेन डायमंड के चेयरमैन नील सोनावाला आशा करते हैं कि बजट में समकालीन और हल्के डिजाइन वाले हीरे के गहनों की बढ़ती मांग को देखते हुए संगठित खुदरा कारोबार को प्रोत्साहन मिलेगा। एक ऐसा बजट जो डिजिटल समर्थन, मैन्युफैक्चरिंग और उपभोक्ता विश्वास को बढ़ाए, ज्वेरी सेक्टर के अगले चरण के विकास का रास्ता खोलेगा।

कुल मिलाकर, उद्योग एक संतुलित बजट की उम्मीद कर रहा है जो गहनों को किफायती बनाए, निर्माण और निर्यात को मजबूत करे और भारत को वैश्विक गहना बाजार में एक ताकत के रूप में स्थापित करने में मदद करे।

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