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ममता बनर्जी के किले में अमित शाह का शंखनाद, बोले— बंगाल को चाहिए बॉर्डर सील करने वाली सरकार

कोलकाता 
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए भारतीय जनता पार्टी ने बिगुल फूंक दिया है। मंगलवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने तृणमूल कांग्रेस सरकार को डर और घुसपैठ वाला शासन करार दिया है। उन्होंने कहा है कि राज्य को ऐसी सरकार की जरूरत है, जो बॉर्डर सील कर सके। शाह सोमवार रात कोलकाता पहुंचे थे, जहां उन्हें पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक की है। शाह ने कहा, 'अप्रैल में बंगाल में विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं।' उन्होंने कहा, 'भय, भ्रष्टाचार, कुशासन और घुसपैठ की जगह विकास, विरासत और गरीब कल्याण की एक मजबूत सरकार बनाने का बंगाल की जनता का संकल्प दिखाई पड़ता है।'

उन्होंने कहा, 'टीएमसी के 15 साल के शासन में भय, भ्रष्टाचार, कुशासन और विशेषकर घुसपैठ से बंगाल की जनता भयभीत भी है, आशंकित भी है।' उन्होंने कहा, 'हम बंगाल की जनता को आश्वासन भी देना चाहते हैं और वादा भी करते हैं कि मोदी जी के नेतृत्व में बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के साथ ही यहां की विरासत को पुनर्जीवित करेंगे, विकास की गंगा फिर से तेज गति से बहेगी और गरीब कल्याण को प्राथमिकता देंगे।' उन्होंने कहा, 'बंगाल की सीमा से हो रही घुसपैठ सिर्फ बंगाल का मामला नहीं है, यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। देश की संस्कृति को बचाना है, देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है, तो बंगाल की सीमाओं को सील करने वाली सरकार लानी पड़ेगी। यह टीएमसी नहीं कर सकती, यह सिर्फ भाजपा कर सकती है।'

भाजपा सरकार बनने का दावा
शाह ने कहा, '14 वर्षों से भय और भ्रष्टाचार, बंगाल की पहचान बना हुआ है। 15 अप्रैल, 2026 के बाद जब बंगाल में भाजपा की सरकार बनेगी, तब बंग गौरव, बंग संस्कृति और उसके पुनर्जागरण की हम शुरुआत करेंगे। विवेकानंद जी, बंकिम बाबू, गुरुदेव टैगोर, श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों का बंगाल बनाने का प्रयास करेंगे।' उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ने 39 प्रतिशत वोट प्राप्त किए और 12 सीटें प्राप्त कीं। 2026 में हम निश्चित रूप से प्रचंड बहुमत के साथ बंगाल में भाजपा की सरकार बनाने वाले है।

कांग्रेस पर निशाना
गृहमंत्री ने कहा, '2014 के लोकसभा चुनाव में हमें बंगाल में 17 प्रतिशत वोट और दो सीटें मिली थीं। 2016 के विधानसभा चुनाव में हमें 10 प्रतिशत वोट मिले और तीन सीटें मिलीं। 2019 के लोकसभा चुनाव में हमें 41 प्रतिशत वोट मिले और 18 सीटें मिलीं। 2021 के विधानसभा चुनाव में हमें 38 प्रतिशत वोट मिले और 77 सीटें मिलीं। जिस पार्टी को सिर्फ 3 सीटें मिली थीं, उसे पांच साल के अंतराल में 77 सीटें प्राप्त हुईं। कांग्रेस, जिसकी स्थापना ही बंगाल से शुरू हुई, वह कांग्रेस पार्टी शून्य पर पहुंच गई, और 34 वर्षों तक राज करने वाला कम्युनिस्ट गठबंधन भी एक भी सीट प्राप्त नहीं कर पाया, और हम प्रमुख विपक्ष बने।'

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