मध्यप्रदेश

जनकल्याण के लिए जो कहा, वही करके दिखाया: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जनकल्याण के लिए जो कहा, वही करके दिखाया: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

कथनी नहीं करनी में विश्वास: मुख्यमंत्री डॉ. यादव का जनकल्याण संदेश

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जनकल्याण के लिए जो बात कही गई, उस पर अमल भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में नागरिकों की समृद्धि के लिए दो वर्ष में किए गए विशेष कार्यों और अर्जित उपलब्धियों की बिंदुवार जानकारी बुधवार को मध्यप्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में दिए गए संबोधन में सदन में प्रस्तुत की। इन में प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार है:-

    पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल जी की जन्म वर्षगांठ पर आगामी 25 दिसम्बर को ग्वालियर में उद्योग वर्ष के समापन अवसर पर 2 लाख करोड़ के निवेश से विभिन्न इकाईयों के भूमि पूजन का कार्य हो रहा है।

    मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और राजस्थान के क्षेत्रों में संयुक्त चीता कॉरीडोर बनाने की पहल। गांधी सागर और नौरादेही में भी चीते बसाएंगे।

    शिवपुरी में 9वें टाइगर रिजर्व पार्क की शुरूआत।

    रीजनल औद्योगिक कॉन्क्लेव के साथ ही रेडिमेड और खिलौना निर्माण इकाईयों में कार्य करने वालों को प्रोत्साहन राशि।

    आने वाले समय में सेटेलाइट के माध्यम से किसानों के खेतों और खसरा खतोनी की जानकारी प्राप्त कर घर बैठे खाद पहुंचाने का संकल्प।

    स्वास्थ्य क्षेत्र में चिकित्सा अधिकारियों सहित अन्य पदों पर लगभग 42 हजार नियुक्तियों की स्वीकृति।

    वर्ष 1956 में प्रदेश में 5 मेडिकल कॉलेज थे। गत डेढ़ वर्ष में 6 नए कॉलेज प्रारंभ, पीपीपी मोड पर 14 कॉलेजों के लिए निविदा की कार्यवाही। दिसम्बर 2025 में 4 मेडिकल कॉलेजों का भूमि पूजन निर्धारित। प्रदेश में 52 मेडिकल कॉलेज हो जाएंगे। सभी जिलों में कॉलेज होगा।

    प्रत्येक संभाग में वन्य प्राणी संग्रहालय और रेस्क्यू सेंटर प्रारंभ करने की पहल।

    राजधानी भोपाल में बड़ी झील में शिकारों से पर्यटकों और नागरिकों को कश्मीर का सुखद अहसास।

    इंदौर में मेट्रो प्रारंभ। भोपाल में मेट्रो ट्रेन संचालन शीघ्र।

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जन्म वर्षगांठ 17 सितम्बर को धार जिले में पीएम मित्रपार्क की आधारशीला रखी।

    प्रदेश में सिकल सेल एनीमिया नियंत्रण की ठोस पहल कर पीढ़ियों को गंभीर जन्मजात रोग से बचाने का प्रयास।

    भगोरिया को राष्ट्रीय पर्व की मान्यता दी गई। उज्जैन में बाबा महाकाल की सवारी में जनजातीय वर्ग की भागीदारी की शुरूआत की। जनजातीय गौरवशाली विभूतियों के सम्मान में जबलपुर, सिंग्रामपुर और पचमढ़ी में मंत्रिपरिषद की बैठकें की गईं।

    राज्य में तेज ध्वनि यंत्रों पर नियंत्रण की पहल।

    गौ-संरक्षण के राज्य में ठोस प्रयास किए गए।

 

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