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दिव्यांगजन मानव अधिकार संरक्षण में सांकेतिक भाषा सहायक : मंत्री कुशवाहा

दिव्यांगजन में है दिव्य-शक्ति विद्यमान

भोपाल 
सामाजिक न्याय दिव्यांगजन कल्याण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाहा ने कहा है कि "सांकेतिक भाषा मानव अधिकारो के संरक्षण में सहायक होती है।" उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन में दिव्य शक्तियां विद्यमान हैं, केवल उन्हें अवसर की आवश्यकता है। मंत्री श्री कुशवाहा सामाजिक न्याय विभाग के सभागार में राज्य स्तरीय सांकेतिक भाषा दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।

मंत्री श्री कुशवाहा ने कहा कि दिव्यांगजन अधिकार संरक्षण के लिए राज्य से लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रयास जारी हैं, इसी कड़ी में यूनाइटेड नेशन द्वारा 2017 में 23 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। इसी दिन प्रति वर्ष सांकेतिक भाषा दिवस का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में सामाजिक न्याय विभाग सांकेतिक भाषा को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयासरत है। विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से साइन लेंग्वेज पर कार्य किया जा रहा है। जो संस्थाएं इस क्षेत्र में काम कर रही हैं, उन्हें केंद्र और राज्य सरकार द्वारा आर्थिक अनुदान के साथ अन्य सहयोग प्रदान किया जा रहा हैं। मध्यप्रदेश में डेफ केन फाउंडेशन द्वारा किए जा रहे प्रयास प्रशंसानीय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के समृद्ध भारत के सपने को साकार बनाने में दिव्यांगजन की भागीदारी भी आवश्यक है। प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा 'विकलांगता' के स्थान पर 'दिव्यांगता' शब्द दिया गया है। इसका आशय है कि दिव्यांगजन में देवीय-कृपा से दिव्य शक्तियाँ हैं। यह वर्ग खेलकूद से लेकर हर क्षेत्र में नये कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि डेफ फाउंडेशन द्वारा मूकबधिर वर्ग को दो और चार पहिया वाहनों के ड्राइविंग लाइसेंस बनाने तथा मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम की पुस्तकों की ब्रेनलिपि में बनाने की माँग पर शासन स्तर पर शीघ्र विचार किया जायेगा।

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विधायक श्री भगवानदास सबनानी ने कहा कि दिव्यांगजन में प्रतिभा की कमी नहीं है, वह हम सब की तरह सामान्य जीवन जी सकते है। मूकबधिर होने की स्थिति में अपनी भावनाऐं शब्दों से नहीं सांकेतिक भाषा में व्यक्त करते है। चिकित्सा के क्षेत्र में नये अविष्कार और खोज से अब इनका इलाज संभव हो पा रहा है। यह सुखद समाचार है। परशुराम बोर्ड के अध्यक्ष पं. विष्णु राजौरिया ने कहा कि सांकेतिक भाषा, मूकबधिर जन के लिये संजीवनी है। उन्होंने कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाली संस्थाओं के बच्चों और प्रशिक्षकों की प्रशंसा की।

कार्यक्रम में डेफ केन फाउंडेशन की श्रीमती प्रीति सोनी द्वारा तैयार किया गीत, अशासकीय संस्था माधुरी आयाम, अशासकीय संस्था उमंग गौरव दीप और आशा निकेतन के बच्चों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई। साथ ही बच्चों को स्मृति चिंह देकर प्रोत्साहित भी किया गया।

 

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