बिहार

कैबिनेट बैठक में 26 प्रस्तावों को दी मंजूरी

रांची

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में शुक्रवार को प्रोजेक्ट भवन में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में कुल 26 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट सचिव वंदना दादेल ने बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी दी।

महत्वपूर्ण स्वीकृतियां और फैसले:

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खूंटी में महिला कॉलेज की स्थापना के लिए 57 करोड़ रुपये, और ईचागढ़ में डिग्री कॉलेज के लिए 38.76 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई।

झारखंड राजकीयकृत प्रारंभिक शिक्षक प्रोन्नति नियमावली 2025 के गठन को भी कैबिनेट की मंजूरी मिली।

राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) के निर्देश पर झारखंड राज्य लेजिस्लेटिव फोरम ऑफ एचआईवी-एड्स के गठन को स्वीकृति दी गई। यह फोरम जिला स्तर पर एड्स नियंत्रण केंद्रों को मजबूत करेगा। इसके अध्यक्ष विभागीय मंत्री होंगे और इसमें स्पीकर द्वारा मनोनीत 5 विधायक शामिल रहेंगे।

सड़क और आधारभूत ढांचे के लिए बड़ी घोषणाएं:

रांची के अरगोड़ा चौक से रिंग रोड तक फोर लेन सड़क निर्माण के लिए 141 करोड़ रुपये।

विवेकानंद स्कूल मोड़ से रिंग रोड तक साइकिल ट्रैक और सर्विस रोड के निर्माण के लिए 301.12 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई।

सिमडेगा–कुरडेग से छत्तीसगढ़ सीमा तक सड़क निर्माण के लिए 38 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भी पारित किया गया।

अन्य अहम फैसले:

झारखंड हिन्दू न्यास बोर्ड को हर वर्ष 3 करोड़ रुपये अनुदान देने का निर्णय।

झारखंड राज्यपाल पदक की संख्या में वृद्धि – अब 11 की बजाय 21 पदक, और सराहनीय सेवा के लिए 31 की जगह 60 पदक प्रदान किए जाएंगे।

ये निर्णय राज्य में शिक्षा, आधारभूत ढांचे, स्वास्थ्य जागरूकता और पुलिस सेवा के क्षेत्र में बड़े सुधार लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

कैबिनेट बैठक के दौरान मंत्रालय में छाया अंधेरा
झारखंड की राजधानी रांची में शुक्रवार को झारखंड मंत्रालय में कैबिनेट की बैठक के दौरान बिजली बार-बार कटती रही, जिससे मंत्रालय परिसर में अंधेरा छा गया। स्थिति यह हो गई कि कई कर्मचारी इधर-उधर दौड़ते नजर आए, जबकि कुछ लोग लिफ्ट में फंस गए। लिफ्ट से "बचाओ-बचाओ" की आवाजें सुनाई देने लगीं। कुछ लोग चिल्लाते दिखे, "कोई जेनरेटर चलाओ!" बिजली की इस अव्यवस्था पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने सम्बंधित अधिकारियों को फटकार लगाई और पूछा कि जेनरेटर के होते हुए भी मंत्रालय में अंधेरा क्यों छाया रहा।

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