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कुंडली में गुरु पुष्य योग का बहुत अधिक महत्व, जाने कब और कैसे बनता है गुरु पुष्य योग?

कुंडली में गुरु पुष्य योग का बहुत अधिक महत्व होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि गुरु पुष्य योग कब बनता है और इस योग का निर्माण कैसे होता है. ज्योतिष के अनुसार, गुरु पुष्य योग एक दुर्लभ और अत्यंत शुभ संयोग है जो गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र के पड़ने पर बनता है. यह एक गोचर योग है जो सभी के लिए लाभकारी होता है और इस दौरान किए गए शुभ कार्य स्थायी और फलदायी होते हैं. इसके अलावा इस योग में किए गए उपायों से जीवन में खुशहाली बनी रहती है और आने वाली परेशानियों से छुटकारा मिलता है.

गुरु पुष्य योग कब बनता है?
ज्योतिष के अनुसार, गुरु पुष्य योग के लिए गुरुवार का दिन होना अनिवार्य है, क्योंकि गुरुवार का संबंध देवगुरु बृहस्पति से है और 27 नक्षत्रों में से पुष्य नक्षत्र आठवां नक्षत्र है और इसे नक्षत्रों का राजा कहा जाता है. यह अत्यंत शुभ, पुष्टिदायक और कल्याणकारी माना जाता है. जब ये दोनों (गुरुवार और पुष्य नक्षत्र) एक साथ आते हैं, तो गुरु पुष्य योग का निर्माण होता है. इसे गुरुपुष्यामृत योग भी कहते हैं.

गुरु पुष्य योग का कुंडली में महत्व
गुरु पुष्य योग किसी विशेष व्यक्ति की कुंडली में बनने वाला योग नहीं है, बल्कि यह गोचर का योग है. यानी, यह आकाश में ग्रहों और नक्षत्रों की विशेष स्थिति के कारण बनता है और एक निश्चित समय के लिए सभी के लिए प्रभावी होता है. गुरुवार का दिन बृहस्पति ग्रह से संबंधित है, जो ज्ञान, धन, धर्म, भाग्य और विस्तार का कारक ग्रह है. पुष्य नक्षत्र के देवता बृहस्पति और स्वामी शनि देव हैं. इसलिए, पुष्य नक्षत्र शनि प्रधान होता है, लेकिन इसकी प्रकृति गुरु जैसी होती है. शनि स्थिरता, अनुशासन और स्थायित्व का कारक है.

जब गुरु (बृहस्पति) और पुष्य नक्षत्र (जिसके स्वामी शनि और देवता बृहस्पति हैं) का शुभ संयोग बनता है, तो यह योग अत्यधिक शक्तिशाली हो जाता है. बृहस्पति अपनी शुभता को बढ़ाता है और शनि उस शुभता को स्थायी बनाता है.

गुरु पुष्य योग का महत्व
ऐसी मान्यता है कि गुरु पुष्य योग में किए गए कार्य या खरीदी गई वस्तुएं अक्षय फल देती हैं, यानी उनका प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है और उनमें वृद्धि होती है. इस दिन सोना, चांदी, गहने, वाहन, घर, जमीन, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि खरीदना बहुत शुभ माना जाता है. व्यापार शुरू करना, विद्या आरंभ करना, नए सौदे करना, गृह प्रवेश करना, या कोई भी नया और महत्वपूर्ण काम शुरू करना इस योग में बहुत लाभकारी होता है. इस योग में माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने से धन-संपत्ति में बढ़ोत्तरी होती है. यह योग जीवन में शांति, समृद्धि और खुशियां लाता है. विशेष रूप से यह गुरु और शनि से संबंधित दोषों को कम करने में सहायक होता है.

 

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