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टी बी मुक्त भारत अभियान के लिए हुई बैठक, फोकस बेस्ड एप्रोच आधारित गतिविधियों पर होगा जोर- सी एम एच ओ

भोपाल
टीबी मुक्त भारत अभियान की तैयारियों को लेकर मैदानी कार्यकर्ताओं की बैठक आयोजित की गई । बैठक में टीबी उन्मूलन के लिए फोकस्ड एप्रोच पर कार्य करने की रणनीति पर चर्चा की गई। जिसके तहत मधुमेह के मरीजों, कुपोषित, धूम्रपान करने वाले, शराब सेवन करने वाले, पूर्व टीबी मरीज, संपर्क व्यक्ति और एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों को लक्षित कर गतिविधियों का आयोजन किए जाने पर जोर दिया जाएगा।

 टीबी मुक्त भारत अभियान का उद्देश्य उच्च जोखिम वाले मरीजों की स्क्रीनिंग, जांच, और उपचार प्रदान करना है। इसके पूर्व प्रदेश के 23 उच्च-प्राथमिकता वाले जिलों में 100  दिवसीय निक्षय शिविरों का आयोजन 7 दिसंबर से 25 मार्च 2025 तक आयोजित किया गया था। जिसे विस्तार देते हुए पूरे प्रदेश में अभियान संचालित किया जा रहा है।

अभियान के तहत पंचायतों,  शहरी स्थानीय निकायों, स्वसहायता समूहों, जन आरोग्य समिति, महिला आरोग्य समिति, ग्राम स्वास्थ्य पोषण एवं स्वच्छता समिति के साथ मिलकर जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। नए निक्षय मित्रों और टीबी चैंपियंस/विजेताओं की पहचान की जाएगी, ताकि उनकी सहभागिता से अभियान को और गति दी जा सके। त्योहारों और मेलों के दौरान धार्मिक गुरुओं के माध्यम से जागरूकता संदेश प्रसारित किए जाएंगे, और स्कूलों और कॉलेजों में कला और सांस्कृतिक गतिविधियाँ, रैलियाँ आयोजित की जाएंगी। इसके अलावा, टीबी शपथ के आयोजन, स्वास्थ्य विभाग के अलावा अन्य सरकारी विभागों में "नि-क्षय सप्ताह" के आयोजन के तहत जागरूकता सत्र, निक्षय शिविर, प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाएंगी।

जिला क्षय उन्मूलन अधिकारी डॉ प्रांजल खरे ने बताया कि अभियान के तहत विभिन्न शिविरों का आयोजन प्रमुख सार्वजनिक स्थानों जैसे रेलवे और बस स्टेशनों, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और स्वास्थ्य केंद्रों पर किया जाएगा। नि-क्षय शिविरों का आयोजन कारखानों, उद्योगों, ईंट भट्टों, निर्माण स्थलों, क्रेशरों पर किया जायेगा, ताकि श्रमिक वर्ग और अन्य संवेदनशील वर्गों तक इस अभियान का लाभ पहुँच सके।

 मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ प्रभाकर तिवारी ने बताया कि राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत अभियान का उद्देश्य टीबी उन्मूलन के प्रयासों को और अधिक गति देना और जन-जागरूकता को बढ़ावा देना है। अभियान के तहत आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों और टी.बी. के मरीजों की स्क्रीनिंग, जांच एवं जागरूकता गतिविधियां की जाएगी।

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