उत्तर प्रदेश

प्रभु श्री राम खुद कंधा देने आए, भावुक हो गए लोग, अरुण गोविल ने उठाई शहीद STF इंस्पेक्टर सुनील कुमार की अर्थी

मेरठ
यूपी के शामली जिले की मुठभेड़ में शहीद इंस्पेक्टर सुनील कुमार का उनके मेरठ स्थित पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किया गया. इस दौरान रामानंद सागर की रामायण के किरदार (राम) और बीजेपी सांसद अरुण गोविल ने शहीद की अर्थी को कंधा दिया. इसको लेकर सोशल मीडिया यूजर्स के भावुक कमेंट्स देखने को मिले. दरअसल, अभिनेता और सांसद अरुण गोविल मेरठ के मसूरी गांव में शहीद इंस्पेक्टर सुनील कुमार के घर शोक संतृप्त परिवार को ढांढस बंधाने के लिए पहुंचे थे. वहां की कुछ तस्वीरें शेयर करते हुए सांसद की ओर से लिखा गया, ''जनपद शामली में अपराधियों के साथ साहसिक मुठभेड़ के दौरान कर्तव्य पालन करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए मेरठ के मसूरी गांव निवासी उत्तर प्रदेश एसटीएफ के निरीक्षक सुनील कुमार जी को उनके निवास पर जाकर अपनी श्रद्धांजलि दी. ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें व शोक संतप्त परिजनों को यह अपार दुःख सहन करने की शक्ति दें. जय श्री राम.''

रामायण के 'राम' की इसी पोस्ट पर एक यूजर ने कमेंट किया, ''जिस शरीर को राम स्वरूप अरुण जी ने कंधा दिया हो, उनकी आत्म शांति मिल गई होगी.'' वहीं, एक अन्य ने लिखा, ''प्रभु श्री राम खुद कंधा दे रहे हैं.'' इसके अलावा एक और ने कमेंट में लिखा, ''आप (शहीद इंस्पेक्टर सुनील कुमार) बहुत खुशनसीब हो कि भगवान श्री राम के रूप आपके साथ चल रहे हैं. काश! ऐसी किस्मत हमारी भी हो.''

शहीद इंस्पेक्टर की शव यात्रा में शामिल हुए सांसद अरुण गोविल.
पता हो कि शामली जिले में मुठभेड़ में गंभीर रूप से घायल हुए यूपी एसटीएफ के इंस्पेक्टर की बुधवार को गुरुग्राम के एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी. शामली के झिंझिना इलाके में 21 और 22 जनवरी की दरमियानी रात हुई मुठभेड़ में पुलिस इंस्पेक्टर सुनील कुमार (54) को कई गोलियां लगी थीं. एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में एक वांछित अपराधी और उसके तीन साथी मारे गए थे. इस दौरान सुनील को पेट में तीन गोलियां लगीं. उन्हें पहले हरियाणा के करनाल के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था. बाद में उन्हें गुरुग्राम के अस्पताल में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों ने सुनील के लिवर में गोली लगने की वजह से उनकी सर्जरी शुरू की थी. ऑपरेशन के दौरान बुधवार को सुनील की मौत हो गई.

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सुनील कुमार साल 1990 में एक कांस्टेबल के रूप में प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (पीएसी) में शामिल हुए थे और 2002 में हेड कांस्टेबल के रूप में पदोन्नत हुए थे. बाद में वह 2011 में पदोन्नति होने पर प्लाटून कमांडर बने. वह 2020 में 'दलनायक' के रूप में पदोन्नत किए गए थे. वह 2009 से एसटीएफ के लिए काम कर रहे थे और उन्हें उनकी बहादुरी के लिए कई पुरस्कार मिल चुके थे. मृतक सुनील कुमार के परिवार में उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं.

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