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कठुआ में मरे गए आतंकवादी के पास से हाईटेक हथियार और सैटेलाइट डिवाइस मिले जो पाक सेना करती इस्तेमाल

श्रीनगर
जम्मू-कश्मीर में कठुआ जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास  हीरानगर इलाके में सुरक्षाबलों के साथ बुधवार को हुई मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए थे, जबकि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल का एक जवान शहीद हो गया था। सेना के सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि उस मुठभेड़ के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा मारे गए दो आतंकवादियों में एक जैश-ए-मोहम्मद का शीर्ष कमांडर भी शामिल था। सूत्रों के अनुसार, इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि मारे गए दोनों आतंकवादियों को  पाकिस्तानी सेना से मदद मिल रही थी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मारे गए एक आतंकी की पहचान जैश कमांडर रिहान और दूसरे की पहचान उसके निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) के रूप में हुई है। मारे गए आतंकी रिहान के पास से  नाइट स्कोप और फ्रीक्वेंसी सैटेलाइट कम्युनिकेशन डिवाइस वाली एम4 राइफल मिली है। इसके अलावा वह MICRO सैटेलाइट कम्युनिकेशन डिवाइस का भी इस्तेमाल कर रहा था, जिसका इस्तेमाल  पाकिस्तानी सेना, नौसेना और वायु सेना करती है। इससे साफ तौर पर स्पष्ट होता है कि जैश-ए-मोहम्मद के इन आतंकियों को पाकिस्तानी सेना का समर्थन मिल रहा था।

बता दे कि जम्मू-कश्मीर में एक हफ्ते के अंदर  रियासी, कठुआ और डोडा जिलों में आंतकी हमले हुए हैं। इन हमलों में कम से कम 11 लोगों की जान जा चुकी है, जिसमें एक सीआरपीएफ का जवान भी शामिल है। सुरक्षी बलों के साथ मुठभेड़ में दो आतंकी भी ढेर हुए हैं। सूत्रों ने आगे बताया कि 9 जून को रईसी में श्रद्धालुओं की बस पर हुए आतंकी हमले के बाद जैश-ए-मोहम्मद और हिज्ब-उल-मुजाहिदीन के शीर्ष नेतृत्व ने पाकिस्तान के रावलकोट में बैठक की थी।

9 जून को आतंकवादियों ने रियासी जिले में तीर्थयात्रियों को ले जा रही एक बस पर हमला किया था, जिसके कारण बस खाई में गिर गई थी। इस घटना में 10 लोगों की मौत हो गयी थी और 33 लोग घायल हो गए थे। उल्लेखनीय है कि रविवार से लगातार हो रहे हमलों के बाद अब सीमावर्ती जिले राजौरी के नौशेरा कस्बे से ऐसी खबरें आयी हैं कि सेना और पुलिस ने संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद नियंत्रण रेखा के पास के गांवों में तलाशी अभियान भी शुरू किया है।

 

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