छत्तीसगढ़

फारेस्ट विभाग के कर्मचारियों ने रुद्रगंगा के संत फक्कड़ आश्रम को तोड़ा

गौरेला

अमरकंटक की तराई में मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली से सटे जंगलों के बीचोंबीच एकांत क्षेत्र में रमणीय स्थल रुद्र गंगा है यहां ब्रम्हलीन संत फक्कड़ बाबा के आश्रम है। संत इस स्थान पर रहकर साधना, भजन किया करते थे। 55 – 60 वर्षों से ज्यादा के समय से आश्रम है। बाबा के ब्रम्हलीन होने के बाद उनके शिष्य शत्रुघ्न पुरी ने गुरु स्थान को सम्हाल कर रखा हुआ था।

उन्होंने अपने गुरु परंपरा अनुसार भजन, साधना के साथ गुरु स्थान पर रहकर पूजा पाठ में लीन रहते थे। शिष्य संत शत्रुघन पुरी ने संतों और नगरवासियों से कई बार फारेस्ट विभाग द्वारा परेशान करने की सूचना देते रहते थे। रुद्र गंगा आश्रम जाने का रास्ता अधिकारियों द्वारा कई बार बंद भी किया गया है। उन्होंने बताया कि फक्कड़ आश्रम से फारेस्ट विभाग के अधिकारियों को क्या परेशानियां थी उन्हें तक नहीं पता। फारेस्ट विभाग द्वारा रुद्रगंगा में आश्रम को ध्वस्त कर दिया गया है। आश्रम में देख रेख करने वाले संत शत्रुघन का भी कोई अता-पता नहीं है । आश्रम में काली माता की प्रतिमा , संत धूनी और आश्रम को फारेस्ट विभाग द्वारा हटा दिया गया है। इससे अमरकंटक नगरवासी , संत संप्रदाय और आश्रम से जुड़े लोग भारी नाराज और दुखी हैं। संत समाज ने कहा यह एक आघात जैसी बात है। इसका सभी विरोध कर रहे हैं।

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मामले में अधिवक्ता रज्जू सिंह नेताम का कहना है की संत आश्रम तोड़ना संत विरोधी मानसिकता है। रंग महल की साध्वी शिवानी पुरी भी कहती हैं कि यह आश्रम संत तपोस्थली थी। इस आश्रम के जुड़े लोग इस घटना से काफी नाराज हैं और आगे कदम उठाने की बात कह रहे हैं।

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