मध्यप्रदेश

एमपी के कॉलेजों में 6 साल बाद फिर शुरू होगा सेमेस्टर सिस्टम

भोपाल

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) लागू होने के बाद शिक्षा व्यवस्था में तेजी से बदलाव किए जा रहे हैं। मध्य प्रदेश एनर्ईपी लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य है। हालांकि यह स्नातक स्तर पर वार्षिक सिस्टम लागू होने के कारण एनईपी का बहुत अधिक लाभ छात्रों को नहीं मिल पा रहा है। वर्तमान समय की मांग को देखते हुए कॉलेजों में छह साल बाद फिर सेमेस्टर सिस्टम लागू किया जाएगा।

राज्यपाल मंगुभाई पटेल की अध्यक्षता में हुई पिछली समन्वय समिति की बैठक में इस मामले में चर्चा की गई थी। उच्च शिक्षा विभाग भी प्रस्ताव तैयार कर रहा है, लेकिन विधानसभा चुनाव के कारण इसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका। अब नई सरकार के गठन के बाद सेमेस्टर सिस्टम की मांग उठने लगी है। बताया जा रहा है कि उच्च शिक्षा विभाग जल्द ही प्रस्ताव सरकार के पास भेजेगा।

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वर्तमान में दो सिस्टम
वर्तमान समय में दो सिस्टम लागू है। अध्यादेश 14 ए के अनुसार सेमेस्टर और 14 बी के अनुसार वार्षिक सिस्टम कॉलेजों में सेमेस्टर सिस्टम लागू करने के लिए 14 ए को सभी कॉलेजों के लिए लागू करना होगा।

वर्ष 2007-08 में किया था लागू
प्रदेश के विश्वविद्यालयों में वर्ष 2007-08 में सेमेस्टर सिस्टम लागू किया गया था। मध्यप्रदेश यह सिस्टम लागू करने वाला देश का पहला राज्य था। हालांकि इस सिस्टम को लागू करने के बाद से ही यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के स्तर पर इसका विरोध शुरू हो गया था। इसे बंद करने के लिए विरोध-प्रदर्शन भी किए जाते रहे। बंद करने का कारण विश्वविद्यालयों ने जहां सेमेस्टर सिस्टम के बाद चार गुना काम बढ़ने की बात कही थी, वहीं कॉलेज इस बात से नाराज थे कि उन्हें साल भर केवल परीक्षाएं ही आयोजित करनी पड़ रही हैं। शैक्षणिक सत्र में देरी के पीछे भी सेमेस्टर सिस्टम का हवाला ही दिया जा रहा है।

सेमेस्टर प्रणाली में छात्रों के ज्ञान की जांच उचित ढंग से सम्भव है और इनमें सफलता के आधार पर छात्रों को आगे की कक्षाओं में भेजा जाता है। इन परीक्षाओं के आधार पर छात्रों की विषय-सम्बन्धी कठिनाइयों एवं कमजोरियों का निदान किया जाता है। सेमेस्टर सिस्टम में छात्र को साल में दो बार परीक्षा देने का मौका मिलता है। सेमेस्टर सिस्टम के बिना एनईपी का पूरा लाभ छात्रों को नहीं मिल सकता।

-प्रो. आनंद शर्मा, सचिव, प्रांतीय शासकीय महाविद्यालयीन संघ
ग्लोबल स्तर पर पहचान बनाना है तो आज नहीं तो कल सेमेस्टर सिस्टम लागू करना ही होगा। राजभवन में हुई स्टैंडिंग कमेटी भी बैठक में इस पर चर्चा की गई थी।
प्रो. टीआर थापक, पूर्व अध्यक्ष, स्थायी कमेटी

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