Breaking Newsमध्यप्रदेश

गुणवत्ता जांच में 7 दवाएं असफल: छिंदवाड़ा में खरीद–बिक्री पर बैन, स्टॉक हटाने के निर्देश

छिंदवाड़ा
जिले में एक बार फिर दवाओं की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। बिछुआ इलाके में 5 महीने की मासूम बच्ची की संदिग्ध मौत के मामले में जांच के बाद 7 आयुर्वेदिक दवाएं अमानक पाई गई हैं। इसके बाद जिला आयुष विभाग ने इन सभी दवाओं की बिक्री और खरीदी पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। 30 अक्टूबर को बिछुआ कस्बे में संदीप मिनोट की 5 महीने की बच्ची सर्दी-खांसी से पीड़ित थी। इलाज के लिए वे कुरोठे मेडिकल स्टोर पहुंचे, जहां से उन्होंने कासामृत सीरप और 16 पुड़िया दवाई खरीदीं। स्वजनों के मुताबिक, दवाई देने के कुछ समय बाद ही बच्ची की तबीयत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। स्वजनों ने मामले की शिकायत आयुष विभाग में की।
 
मानकों पर खरा नहीं उतरीं सातों दवाएं
शिकायत के बाद आयुष विभाग ने मौके से दवाओं के सैंपल लेकर ग्वालियर की लैब में भेजे। रिपोर्ट आने पर पता चला कि कासामृत सीरप, गिलोय सत्व, कामदुधा रस, प्रवाल पिष्टी, मुक्ता शक्ति भस्म, लक्ष्मी विलास रस, कफ कुठार रस ये सातों दवाएं मानकों पर खरा नहीं उतरीं। रिपोर्ट आते ही जिला आयुष अधिकारी डॉ. प्रमिला यावतकर ने कार्रवाई करते हुए इन सभी दवाओं की खरीदी-बिक्री पर प्रतिबंध कर दिया है।

विभाग ने मेडिकल स्टोर और सप्लायर्स को निर्देश जारी कर दिए हैं कि जब तक जांच पूरी न हो, इन दवाओं को न स्टॉक करें और न ही बेचें। छिंदवाड़ा में इससे पहले कोल्ड्रिफ सीरप से हुई 24 बच्चों की मौत ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी थी, जिसके बाद कोल्ड्रिफ और उसके बाद यह नया मामला सामने आने से जिले में दवाओं की गुणवत्ता पर फिर से गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

घटना के बाद बिछुआ और आसपास के गांवों में लोग डर में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब छोटे बच्चों के लिए दी जाने वाली दवाएं ही सुरक्षित नहीं हैं, तो भरोसा कैसे करें? परिजनों ने मेडिकल स्टोर संचालक और दवा सप्लायर पर भी कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

Related Articles
Show More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button